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Archive for March 25th, 2010

VOH DIN YAAD KARO………….


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रुलाती है यादे बीते दिनों की


पिघलते है जब ख्वाब आंसुओं से


 


रहता  नहीं  काबू  उस  वक़्त  दिल पर हमारा


जब बंद आँखों को छूती  है साँसे तुम्हारी


चाहत की मौसम मे बरसना तुम्हारा


रुलाता है आज भी वो बीते दिनों का सरमाया


 


मालुम है हमे  की याद करती हो तूम भी  

कोरी आँखों  से  कई  बार  रोते  हो तूम भी

समझ जाते है  पढ़कर  अधुरा  ख़त  तूम्हारा


रुला देती  है हमें भी याद बीते दिनों की


 


धड़कते दिल से इंतज़ार के वो पल


रूठना – मनाने में बीतते  वोह  पल

दिल के तार  इक  दुसरे  के   मिलन के वो पल


रुला देती  है हमें भी तब यादे उन  दिनों  की


 


पिघलने  लगते  है  वो ख्वाब आंसुओं से


रूलाती है यादे हमें भी उन  बीते दिनों की…………
 /…………………………………..aameen 

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