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धरती को भिगोती बारिश
आज पहली बार अधूरी लगी
मंजील पाने की चाह में
आज पहली बार सपने अधूरे लगे
पहोंचू तो कैसे तूम्हारे द्वार
तूम्हारी गली के सारे रास्ते
आज मूज़े अधूरे लगे
मिलना भी हुआ तूम से यूं की
हमारे मिलन के लिये
आज यह जनम अधूरा लगा
तूम्हारा साथ मांगू भी तो किसके पास
तूम्हे माँगने को आज भगवान् भी अधूरे लगे
चाहता था की तूम्हारी याद में तड़प
आहे भरु और आंसू बहाऊ
मगर मेरी आँखों को आसूं भी
मेरी बाते तूम जान न पायी
मेरे प्यार की बारिश मे तुम भीग न पायी दिल के कोरे कागज़ पर नाम तूम्हारा ही था
मगर तूम उसे पढ़ न पायी
हमारे दिल की सभी बाते तूमको कह दी
मगर तूम अपना दिल खोल ना पायी
घर जलाकर रोशनी करने वाले
मगर तूम सच्ची प्रीत को पहचान ना पायी
अंगारों की सेज पर हम चलते रहे
और तूम दो बोल बदनामी के सह ना पायी
हमारी प्रीत तो दुनिया मे मशहूर है
रुलाती है यादे बीते दिनों की
पिघलते है जब ख्वाब आंसुओं से
रहता नहीं काबू उस वक़्त दिल पर हमारा
जब बंद आँखों को छूती है साँसे तुम्हारी
चाहत की मौसम मे बरसना तुम्हारा
रुलाता है आज भी वो बीते दिनों का सरमाया
समझ जाते है पढ़कर अधुरा ख़त तूम्हारा
रुला देती है हमें भी याद बीते दिनों की
धड़कते दिल से इंतज़ार के वो पल
दिल के तार इक दुसरे के
रुला देती है हमें भी तब यादे उन दिनों की
पिघलने लगते है वो ख्वाब आंसुओं से
रूलाती है यादे हमें भी उन बीते दिनों की…………
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हुए जख्म दिल पर और आँखों को असर हो गयी
प्यार में मेरी बर्बादी दुनिया मे मशहूर हो गयी
नहीं समझ मे आती आज भी तेरी जुदाई की वजह
ख्यालों में खो
प्रेम पथ पर बनाया था इक सपनों का महल
विश्वास के दीवारों पर आज इक दरार हो गयी
मेरी कब्र पर इक दिन निकल आएगी घासफूस
दूनिया कहेगी देखो हरियाली ही हरियाली हो गयी…………
…………………………………………….aameen
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तुम्हे याद करू तो अपना अस्तित्व लगे है
तुम्हे दिल मे रखु तो दिल खूश रहता है
जहा तूम नहीं वहां उदासी घेर लेती है
तुम्हारी याद बिना यह दुनिया बेसुरी लगती है
तुम्हारी कल्पना करता हूँ और
मेरी हरेक कल्पना रंगीन हो जाती है
उन्ही रंगों मे भी अनेक रंग समां जाते है
उन्ही रंगों मे इक प्रेम का रंग होता है
जो तुम्हारी जिस्म की महक का आगाज़ करता है
हम तुम्हे याद करने लग जाते है
और तुम्हारी यादों मे अपना अस्तिव खोजने लगते है.
हमारी नजरो के सम्बन्धो को कोई तो नाम दो
इस अनजान दिल को तुम्हारी कोई तो पहचान दो
यकीन आये ऐसा कोई तो यकीन दो
कबतक इस तरह दूर बैठे बाते करोगी
रूबरू मुलक़ात की एक तो शाम दो
लब्ज परेशान है की जुबा से बाहर निकले कैसे
कुछ कहने मिल सकू ऐसी कोई तो जगह बता दो
अगर जो है तुम्हे हमसे सच मे मुहब्बत
तूम मेरी यादे बन गयी
सपनों मे आकर दिल मे बस गयी
तुम्हारी यादों की तो क्या बात
देखा है जबसे दिल मे उतर गयी
तुम्हारी वो सुनहरी यादें कहू किसे
नज़रों से नज़रे मिली और यादें कहानी बन गयी
तमन्ना है की मै प्यार का इकरार करू
मगर तुम क्या जवाब दोगी सोच बेचैनी बढ़
तूम्हे पाने की आस लिए बैठे है हम
बरस जाओगी किसी दिन समझूंगा आशा
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नज़र मिलते ही मुस्कुरा देना
और एक दुसरे से अनजान रहना
है कोई मायने इसके?
रास्तों में सामने मिलना
और मूंह मोड़कर चल देना
है कोई मायने इसके?
सामने होते हुए भी बात न करना
ना हो तो
है कोई मायने इसके ?
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बातों बातों मे प्यार हो
युँ भावानाओं मे बह जाएंगे
आँखे चार होने का कोई तो
वर्ना ओठ सीले हुए और प्यार भरी बाते होगी किसे खबर
हम तो वही खडे रह गए, और रास्ते चलने लगे
मगर ये प्रेम कन्तक चुभेंगे ये किसे खबर
दिल मे बस गई छवी और तैरती रही आंखों मे
दो दिलों का सफर गज़ल बनकर गुन्जेगा किसे खबर ……
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