अब तो करलो बुद्धि मित्र ठिकाने पर
मुंबई भी रक्खी हैं आज निशाने पर
सौ-सौ लोगों को खोकर भी खामोशी
कब टूटेगी सिंघासन की बेहोशी
अंधे लालच का सिन्धु भरके चित में
ध्रतराष्ट्र हैं मौन स्वयं-सुत के हित में
वरना वो खुनी पंजे तुड़वा देते
अब तक अफजल पे कुत्ते छुड़वा देते
जो ये कहते हैं भारत के रक्षक हैं
वो ही अफजल जैसों के संरक्षक हैं
बेशक सारे भारत का सर झुक जाये
उनकी कोशिश हैं ये फाँसी रुक जाये
निर्णय लेना होगा अब सरकारों को
पहले फांसी होगी इन गद्दारों को
एक बार फिर दहते स्वर में इन्कलाब गाना होगा
फांसी का तख्ता जेलों से संसद तक लाना होगा.
Presented By Krishna
Compose by Rahul
Posted in Poetry.
By Krishna singh
– December 4, 2008
हाल ही में बिल
गेट्स ने एक हाईस्कूल में भाषण देते हुए बच्चों को बताया था कि स्कूल में
वे इन 11 चीजों पर ध्यान दें। उन्होंने इस बारे में बातचीत की कि कैसे
अच्छा महसूस किया जाता है। राजनीतिक रूप से परिष्कृत शिक्षण किस तरह ऐसे
बच्चों की पीढ़ी का सृजन करताहै जिसमें वास्तविकता की कोई अवधारणा नहीं
होती है तथा किस तरह यह अवधारणा उन्हें वास्तविक जगत में असफल बनाती है।
नियम 1 : जिंदगी हमदर्द नहीं है, इसका इस्तेमाल करो।
नियम 2 : दुनिया
आपके आत्मसम्मान की परवाह नहीं करेगी। दुनिया आपसे यह अपेक्षा करेगी कि आप अपने बारे कुछ अच्छा महसूस करने के पहले कुछ हासिल करें।
नियम
3 : आप सीधे हाईस्कूल से निकलकर हर साल 40 हजार डॉलर नहीं कमा पाएँगे। आप
तब तक कार और फोन की सुविधा प्राप्त किसी कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट नहीं
होंगे, जब तक कि आप उस ओहदे को खुद हासिल नहीं कर लेते।
नियम
4 : यदि आप सोचते हैं कि आपके शिक्षक सख्त हैं तो आप अपने बॉस के मिलने तक
इंतजार कीजिए, तब आपको पता चलेगा कि सख्ती क्या होती है।
नियम
5 : एक फूला हुआ बर्गर भी आपकी प्रतिष्ठा से नीचे नहीं है। आपके माता-पिता
बर्गर के लिए कोई दूसरा शब्द चुनते थे। वे इसे अवसर कहते थे।
नियम 6 :
यदि आप मिलनसार नहीं हैं तो यह आपके माता-पिता का दोष नहीं है, इसलिए अपनी गलतियों के लिए चिल्लापो न मचाएँ। उनसे सबक सीखें।
नियम
7 : आपके जन्म से पूर्व आपके माता-पिता उतने उबाऊ नहीं थे जितने कि वे अब
आपको ऊबाऊ लगते हैं। वे आपके बिलों का भुगतान करते हुए, आपके कपड़े धोते
हुए और आपके बारे में सुनते हुए इस स्थिति तक पहुँचे हैं, इसलिए अपने
माता-पिता को प्यार करें और उनकी अवहेलना न करें।
नियम
8 : आपके जीवन में आपने हार-जीत के दर्शन किए होंगे, लेकिन जीवन में हार
किसी को स्वीकार नहीं होती है। कुछ स्कूलों में फेल होने की ग्रेड ही
समाप्त कर दी है गई है, लेकिन जिंदगी में ग्रेस पास या सप्लीमेंट्री की
कोई गुंजाइश नहीं है। इसलिए हमेशा सफलता को ही ध्येय बनाएँ।
नियम
9 : जीवन सेमिस्टर में नहीं बँटा होता है। आपको यहाँ गर्मी की छुट्टियाँ
भी नहीं मिलती हैं तथा कुछ ही नियोक्ता आपको खोजने में मददगार साबित होते
हैं, इसलिए आप खुद को पहचानें।
नियम 10 : टेलीविजन वास्तविक जीवन नहीं है। वास्तविक जीवन में लोगों को
काफी शॉप
छोड़कर काम करने जाना होता है।
नियम 11 : अवसर कभी समाप्त नहीं होते। आप एक अवसर गँवाते हैं तो दूसरा आपके सामने होता है।
Posted in Philosophy.
By Krishna singh
– November 22, 2008
Biccharh Gaya hai toh uska sath kya mangoon
Choti si zindagi hai gham
se nijaat kya mangoon
woh hota toh hotin
zaroortein bhi buhat
Akeli jaan ke liye
kaayenaat kya mangoon
Krishna
Posted in Love.
By Krishna singh
– November 14, 2008
Posted in Love.
By Krishna singh
– November 12, 2008
doston wo to qayamat ki ghari hoti hay
jis taraf jaen jahan jaen bhari dunya may,
rastaa rokay teri yaad khari hoti hay
jis nay mar mar k guzari ho ye us say pocho,
hijr ki raat bhala kitni kari hoti hay
hanstay honton say bhi jartay hain fasanay gum k,
khushk ankhon may bhi sawan ki jari hoti hay
jub koi shaks kahin zikr e wafa karta hay,
dil ko ae doston takleef bari hoti hay.
Krishna
Posted in Love.
By Krishna singh
– September 24, 2008
Rehnewalon Se Nahi, Jaanewalon Se Pucho,
Ki Zindgi Kya Cheez Hoti Hai.
Panewalon Se Nahi, Khonewalon se Pucho,
Ki Izzat Kya Cheez Hoti hai.
Amiron Ko Kya Dekthe Ho, Zara Garibon Se Pucho,
Ki Daulat Kya Cheez Hoti Hai,
Arre Jiss Ne Dil Diya Hai Usse Nahi,
Jiska Dil Toota Hai Usse Pucho, Ki Mohabbat Kya Cheez Hoti Hai ………………………
Krishna
Posted in Love.
By Krishna singh
– September 20, 2008