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मुझे तो उस ओर जाने दो, जहां दर्द का समंदर है …..



मुझे तो उस ओर जाने दो, जहां दर्द का समंदर है …..

 

जो बने हकीकत है जीना,

और इधर-उधर किताबों से बहुत बीना,

जिद ने बनाए  वे सभी रास्ते,

जिस पर चला अपनी जिद वास्ते,

नकाबों को खुद रहा ओढ़ता,

चाह पूरी न हो भाग्य कोसता,

सच्चाई बदल दी तर्क ने,

पर एहसास मरा नहीं मर्म से,

मुझे तो उस ओर जाने दो,

जहां दर्द का समंदर है …..


 

शुभकामनाओं के साथ,

 

केशव सिंघल  

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2 Responses

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  1. shashank rastogi says

    ACHCHHI KAVITA KI HAI, Thanks.

  2. shikha mishra says

    Nice poem…