मुझे तो उस ओर जाने दो, जहां दर्द का समंदर है …..
जो बने हकीकत है जीना,
और इधर-उधर किताबों से बहुत बीना,
जिद ने बनाए वे सभी रास्ते,
जिस पर चला अपनी जिद वास्ते,
नकाबों को खुद रहा ओढ़ता,
चाह पूरी न हो भाग्य कोसता,
सच्चाई बदल दी तर्क ने,
पर एहसास मरा नहीं मर्म से,
मुझे तो उस ओर जाने दो,
जहां दर्द का समंदर है …..
शुभकामनाओं के साथ,
केशव सिंघल
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ACHCHHI KAVITA KI HAI, Thanks.
Nice poem…