कबीर ने मुझे परिभाषित करते हुये कहा था:जल में कुम्भ,कुम्भ में जल है।बाहर भीतर पानी॥फुटा कुम्भ, जल जल ही समाना।यह तत कथौ ज्ञानी।यानि आत्मा का परमात्मा में विलय का ही नाम मृत्यु है। लघु का विशाल में समन्वय ही मृत्यु है। लहर का समुद्र में समाहित हो जाना मेरा परिचय है। तत्काल उसके पश्चात उसी [...]
