Ek Sapna
Posted in Personal on 09/10/2009 11:59 am byएक छोटा सा सपना है इन खुली आँखों का
एक घर हो पूरा पूरा भरा भरा
खेले मेरी परी उसके आंगन मै
बेठे उसके पिता उस झूले मै
सुबह की हो लाली, ऑर उनकी वो चाय की प्याली
झलाए मुझे उनका वो अखबार
लगी मेरी बातें उन्हे बेकार
करे सुन के अनसुना परी आवाज़ मेरी
खेले मिट्टी मै ऑर दौड़ कर छुप जाए
गोद मै उनकी, सुने जो डांट्ड मेरी
मेरे रूठने पर बाप बेटी का वो मानना
मुझे गुदगुदाना, वो हसना ऑर हसाना
"अररी पगली, ये तो एक सपना है तेरा जो देखा है तूमें खुली, आँसू भारी आँखों से"
अचानक बोला ये दिल मेरा और ..
और
जाग गई मै !!!!!!!