अध्यात्म
कहता है कि
सबके साक्षी
हो जाओ और बिना
उसका रूप या
भागीदार बने
जितनी भलाई या
सहायता आपसे
हो सकती है,
उतनी जरूर
करो। लेकिन
समस्या तब आती
है, जब हम
स्वयं भी उनका
रूप या हिस्सा
बनने लगते
हैं। जैसे
रिश्तेदारी
में कोई
परेशानी होने
पर हम उसी के
बारे में
सोचते रहते
हैं या उसे ले
कर खुद भी
परेशान रहने
लगते हैं।
जबकि एक सीमा
के आगे हम
उसमें कुछ कर
नहीं सकते,
सबकी
अपनी-अपनी
यात्रा है।
संसार इसी तरह
से चलता
है।
हमारी
तीन तरह की
फैमिली होती
है
-बायोलॉजिकल
फैमिली,
इंटेलेक्चुअल
फैमिली और
स्पिरिचुअल
फैमिली।
बायोलॉजिकल
फैमिली में
सगे संबंधी
आते हैं,
इंटेलेक्चुअल
फैमिली में
बौद्धिक स्तर
पर साथ काम
करने वाले
हमारे कलीग्स
और प्रफेशनल
फ्रेंडस आते
हैं। इनसे जब
मिलते हैं तो
बुद्धि के
स्तर पर चर्चा
करते हैं।
तीसरी होती है
स्पिरिचुअल
फैमिली। जब हम
आध्यात्मिक
उन्नति के लिए
किसी को अपना
आध्यात्मिक
गुरु बनाते
हैं, तब उन
गुरु द्वारा
दीक्षित सभी
शिष्य एक
फैमिली की तरह
हो जाते हैं।
हम उनसे जब भी
मिलते हैं तब
ज्ञान की
चर्चा करते
हैं, प्रकृति
की चर्चा वहां
नहीं
होती।
इन
तीनों
फैमिलीज का
अपना-अपना
प्रभाव होता
है। लेकिन आम
तौर पर
बायोलॉजिकल
फैमिली से लोग
सिर्फ तमोगुण,
इंटेलेक्चुअल
फैमिली से
रजोगुण और
स्पिरिचुअल
फैमिली से
सत्व गुण ही
ग्रहण किया
करते हैं। मोह
और आसक्ति के
कारण हम में से
अधिकतर लोग
अपना दायरा
अपनी
बायोलॉजिकल
फैमिली तक ही
सीमित कर देते
हैं। वही
हमारे सुख-दुख
का कारण बन
जाता है।
यह
आसक्ति तब तक
ज्यादा होती
है जब तक हमारी
स्पिरिचुअल
फैमिली नहीं
होती। कुछ
सोचते हैं कि
स्पिरिचुअल
फैमिली होने
पर कहीं
बायोलॉजिकल
फैमिली छूट न
जाए, लेकिन
वस्तुत: ऐसा
नहीं है। यदि
हम अपनी
स्पिरिचुअल
फैमिली बनाएं
तो ऐसा नहीं है
कि
बायोलॉजिकल
फैमिली पर
ध्यान नहीं दे
पाएंगे।
बल्कि इस
धारणा के उलट
हम विकल्पों
से ऊपर उठ
जाएंगे और
साक्षी भाव
में आकर सबके
लिए अच्छा भाव
रखेंगे।
mahesh chandra sharma
kion banana family jub subh kuch chod kur hi jana hay….lagan lagay tou bus us say lagay,,woh sabad jo saray sansar ko bandh kay rakhay hoay hai sunaee deta rahey aur hum har pul ussay juday rahey,,bhram mein mut raho ji….subh kuch mithya hay,,,subh kuch samajh say paray hay ji…..kewal aur kewal uskee satutee uska gun gan aur ussay prarthana hi maenay rakhay gee,,baki subh uskee mehar aur daya pur hai agar woh kurday ……mehra waliya saenya rakhee charna day kol….
kya kahu………….kise family kahu……………..main bhi mani hu.tu bhi main hun……….sunder ati sunder….