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Posted in Blogs on 09/27/2009 07:43 pm by akhtar rizvi
रावण
क्यूँ नहं लता..??
सभ ोस्तों को वियशम पर्व क
हार्िक शुभकामनायें….!
ोस्तों, कल हम सब बहुत ह धूमधाम के साथ शेहरा पर्व मानाने ा रहे हैं
. हर वर्ष क तरह इस बार भ हम रामलला मैान में मा हो कर रावण को लाएं?े थोड मस्त करें?े,ूमें?े "र फिर र लौट आयें?े "र पने कामों में ल? ायें?े
हर वर्ष हम यह काम करते हैं रामलला े'ते हैं रावण को लाते हैं लेकिन उसके बा रावण क आत्मा ल? ल? रूप बल कर हमर पछा करत रहत है "र हम पूरे वर्ष उसके आतंक को सहते या े'ते हैं…
कभ धरम का रूप लेकर वोह हमें आपस में लडाता है तो कभ आतंकवा का रूप धारण कर वोह ल? ल? ?हों पर तबाह मचाता है..
..कभ सम्प्रायकता के रूप में तो कभ भाषाई ?डो के रूप में…
.कह उंच नच का भूत बनकर तो किस ?ह प्राेशिक नफरत के रूप में वोह हमें सताता रहता है
"र हम हर वर्ष उसे लने के बा भ पूरे वर्ष उसके आतंक के साये में ने पर मबूर होते हैं…
.आ'िर रावण का यह भूत हमारा पछा क्यूँ नहं छोता…??
ोस्तों हर वर्ष क तरह इस वर्ष भ आप रावण का ेहेन करें?े उसे लाएं?े तो क्यूँ न इस वर्ष रावण के इस पुतले के साथ कुछ "र पुतले भ शामिल करलिये ाएँ ैसे'
?रब का रावण
आतंकवा का रावण
सम्प्रायकता का रावण
शिक्षा का रावण
बेरो़?ार का रावण
ातिवा का रावण
क्षेत्रवा का रावण
भाषाई विवा का रावण
उंच नच का रावण
"र सबसे बड़ा आपस भे भाव "र नफरत का रावण
ोस्तों हमें यकन है के ?र एक बार यह रावण इस तरह ला िए ाएँ के वोह फिर ोबारा हमारा पछा न कर सकें "र हमेशा के लिए '़त्म हो ाएँ तो फिर हमारे ेश में रामरा्य कायम होने "र हर तरफ शांति के माहोल को कोई नहं रोक पाये?ा
*** '्तर रि़व