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Posted in Truth on 09/15/2009 01:06 am by akhtar rizvi
हिं पर्व…??
ोस्तों
,सबसे पहले तो आप सभ को ..हिं पर्व क ढेर सार शुभकामनायें…!! आप सोच रहे हों?े के हमने हिं िवस को हिं पर्व क्यूँ लि'ा..? तो ोस्तों ो च़ वर्ष में एक बार बहुत धूमधाम से मनाई ाये तो उसे पर्व नहं कहें?े तो "र क्या कहें?े…? हर वर्ष १४ सितम्बर आते ह हम सब का हिं प्रेम ा? उ ता है हम ोर शोर से इसे एक पर्व क तरह मानानेक तय्यारियों में ल? ाते हैं..?ह ?ह हिं सम्मलेन कार्यालयों, में हिं प'वाडे ,रेडियो "र ूरर्शन से हिं िवस के वसर पर आयोित कार्यक्रमों क रिपोर्ट,सर से पैर तक ं?्रे में नहाये हुए , ं?्रे वर् पहने नेता"ं के भाषण,कहं निबंध प्रितियो?्यतएं तो कहं न्ताक्षर…"र उसके बा…..इतिश्र….. ?ले वर्ष फिर े'ें?े….??
तो ोस्तों आप ने भ इस पर्व को पुरे उत्साह "र हर्ष-"-उल्ल्हस के साथ मनाया हो?ा…. पना हर काम हिं में करने का सकल्प लिया हो?ा,हिं भाषा को आ?े बढाने क शपथ ल हो?…क्यूँ है न?? लेकिन ोस्तों ब भ १४ सितम्बर आत है पता नहं क्यूँ इन आयोनों से हमारा मस्तिष्क ूम ाता है "र हम यह सोचने पर मबूर हो ाते हैं के आ'िर आयोनों का यह सिलसिला कब तक चले?ा..?कब तक हम हर वर्ष ऐसे आयोन करके 'ु को या िलाते रहें?े क हमार मात्रभाषा हिं है??कब तक पने ह ेश में हिं को इस तरह पमानित होना पे?ा ? कब तक हमारा स्वाभिमान नहं ा?े?ा "र कब तक हम पन मात्र भाषा को नारों के रूप में इस्तेमाल करते रहें?े..?आ'िर कब तक..?? ोस्तों किस भ ेश क ो पहचान होत है िस से वोह सार ुनिया में पहचाना ाता है….एक उसका राष्ट्रिये ध्व "र ूसर उसक राष्ट्र भाषा….!लेकिन यह कितन बड़ त्रास है के स्वतंत्रता के ६२ वर्ष बा भ हम पने ेश को एक राष्ट्र भाषा नहं े सके…आ आप े'ते हों?े के छोटे छोटे ेश िनक कुल आबा हमारे एक रा्य से भ कम है ब वोह ुनिया के किस भ ेश में ाते हैं तो सिर्फ पन भाषा में बोलते हैं साथ में उनके ुइभाशिया भ होता है ो उस भाषा का नुवा करता है लेकिन ब हमारे नेता कहं बाहर ाते हैं तो हिं में बात करना,हिं में भाषण ेना पन शान के 'िलाफ समते हैं क्यूंकि क ेश तो स्वतंत्र हो ?या म?र हमारा ़हन आ भ ं?्रेों का ?ुलाम है ं?्रे में बात करने में हमें ?र्व का नुभव होता है हम 'ु को आम हिन्ुस्तान से कुछ ऊँचा समते हैं… ोस्तों हमारे कहने का यह मतलब नहं है के हमें इं?्लिश से कोई चिढ है या हम इं?्लिश पढ़ने या बोलने वाले को ?़लत कह रहे है..बलके हमारा कहना तो यह है के हर व्यक्ति को ुनिया क ्याा से ्याा भाषाएँ स'ना चाहिए बोलना चाहिए "र फिर इं?्लिश तो सार ुनिया में लिंक भाषा के रूप में बोल ात है तो हम उस से कट कर कैसे रह सकते हैं…बिलकुल नहं आ इं?्लिश के बिना ?ुज़ारा नहं हर क़म पर हमें इं?्लिश क ज़रूरत पत है….हम तो केवल इतना कहना चाहते हैं के हाँ इं?्लिश क ज़रूरत न हो वहां तो कम से कम हम पन मात्र भाषा को या र'ें , पने रों में तो हिं का प्रयो? करें पने ेश में तो हिं को पने कामका क भाषा बनायें…हमें इं?्लिश का वाब हिं में ेते शर्म क्यूँ आत है हमें पन भाषा पर ?र्व क्यूँ नहं है.?…आ आप किस भ र में ाएँ वहां आप के ोस्त पने बच्चे से कहें?े..बेटा ंकल को पोयम सुना"…कितने लो? पने बच्चों से कहते हैं बेटा ंकल को कविता सुना" या राष्ट्र ?त सुना" …"र इन सब के पछे हमार वोह ह मानसिकता है के हम ं?्रे बोल कर 'ु को ्याा सभ्य "र ्याा सम्मानित महसूस करते हैं…"र यह ह कारन है के हमें हर साल १४ सितम्बर को हिं िवस मना कर 'ु को यह या िलाना पड़ता है के हिं हमार राष्ट्र भाषा है…"र शाय यह सब करते हुए हम 'ु को उस त्म्?िलान से बचाने क कोशिश करते हैं ो पने ह ेश में पन ह मात्र भाषा हिं से हमें आँ' मिलाने में होत है….!!
** '्तर रि़व