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 27 Jun 2009 @ 3:30 PM 
 

 

सरकारी ऑफीस / फॅक्टरियो / प्राइवेट संस्थानो मैं कार्यरत कर्मचारी के रिश्ते महाभारत् के पात्रो की तरह ही होते है, सबकी महत्वकांक्षा एक छ्त्र राज करने की होती है | सब अपना कर्म करते हुए एकदूसरे के अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिद्वन्दी बने हुए है | कोई डाइरेक्टर धृतराष्ट्र की तरह अंधा होकर अपने चहेते खास अधिकारी दुर्योधन को ही प्रमोट करता रहता है , तो कोई अधिकारी शकुनी की तरह कुटिलता से षडयन्त्र रचता रहता है , तो कोई अकाउंट्स अधिकारी विदुर की तरह उसकी चाल को
कामयाब नाही होने देता | कोई महिला कर्मचारी पांचाली की तरह भीम जैसे दबंग अधिकारी को गुमराह करके उकसाती रहती है | तो कोई प्रतिभावान कर्ण जैसा कर्मचारी उपेक्षा का शिकार होता रहता है तो कोई अर्जुन की तरह किसी दोरणाचार्य जैसे डाइरेक्टर का प्रिय बन जाता है तो कोई कर्मचारी एकलव्या की भाँति त्याग के लिए मजबूर होना पड़ता है| कोई कर्मचारी दुशासन् बनकर महिलाओ की इज़्ज़त तार तार करने मैंकोई कसर नही छोड़ना चाहता | कोई कर्मचारी अर्जुन की तरह , शिखण्डी को आगे करके , भीष्म पर तीरो से वार करता रहता है , कोई अभिमन्यु जैसा कर्मचारी चक्र्व्यहु मै फंस कर रह
जाता है | तो कोई जयद्रथ बनकर पांडवो जैसे कर्मचारी को आगे नही बढ़ने देना चाहता , यानी के 10 तो 5 के पीरियड मै यही महाभारत का घमासान चलता रहता है

Tags Categories: Writing Posted By: SURENDRA SAXENA
Last Edit: 27 Jun 2009 @ 04 19 PM

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