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 22 Oct 2009 @ 6:53 PM 

दोस्तो मुझे यह गाना बहुत पसंद है काफी पुराना है,


शायद यह मेरी लाइफ पे सटीक बैठता


मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया
हर फिक्र को धुए मे उड़ाता चला गया
मैं ज़िंदगी………………..
बरबादियो का शोक मनाना फ़िज़ूल था, मनाना फ़िज़ूल था
बरबादियो का जशन मनाता चला गया
मैं ज़िंदगी………………..

जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया,


मुक़द्दर समझ लिया
जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया,


मैं ज़िंदगी……………….
गम और खुशी मैं फर्क ना महसूस हो जहा,


महसूस हो जहा
मैं दिल को उस मुक़ाम पे लाता चला गया
मैं ज़िंदगी……………….
***************


From :
फिल्म : हम दोनो (1961)
गायक: मो. रफी
लिरिक्स: साहिर लुधियानवी
हीरो : देव आनंद,

Tags Categories: Writing Posted By: SURENDRA SAXENA
Last Edit: 22 Oct 2009 @ 07 20 PM

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