21 Nov 2009 @ 4:27 PM 
 

Yado ke Jharoko se

 

बचपन की याद आप सब लोगो से शेयर कर रहा हू.
1982 की बात है जब मैं 7 क्लास मे था , तो नही पता था की प्यार मोहब्बत क्या होती है, मेरे घर के सामने एक भैय्या रहते थे जो 12 क्लास मे थे, जिनका चार मंजिला मकान था , हमारा भी चार मंजिला मकान था . एक दिन की बात है की , अपने घर की छत पर पतंग उड़ाते उड़ाते शाम हो गयी थी, देखा समने वाले भैया के चोथी मंजिल के कमरे की खिड़किया खुली थी और, उस कमरे की बत्ती जलती और बुझ जाती , हम समझे की लाइट खराब होगी, थोड़ी देर बाद देखा की थोड़ी दूर पर एक घर के 5 मंजिल के कमरे से भी लाइट जल्दी जल्दी बुझती और जल जाती . हम देर तक यह देखते रहे , कुछ समझ नही आया, करीब एक हफ्ते तक हमने यही देखा , तो हमने उन भय्या
की मम्मी से कहा – आंटी आपके उपर वाले कमरे की लाइट खराब है जो जलती बुझती रहती है. आंटी ने भैया से डाट कर कहा उपर कमरे की लाइट खराब है और तुम देख नही सकते. मैने फिर कहा ऐसे ही शर्मा अंकल के उपर वाले कमरे मे भी ऐसा ही होता है.,
आंटी ने दोबारा मुझसे पूछा क्या शर्मा अंकल के भी ऐसा होता है, मैने कहा हा. उन्होने फिर भैया को बोला तेरे पापा से शिकायत करूंगी. भैय्या ने हुमे घूर कर देखा तो हम सहम गये, उस दिन भैय्या ने हमारी शिकायत हमारे पिताश्री से कर दी की यह लोग देर तक पतंग उड़ाते रहते है……..बस फिर क्या था हमारी पतंग और हुच्का आग के हवाले कर दिया गया. लेकिन उनके घर भी लाइट जलनी बूझनी बंद हो गई.
फिर उन्होने काले कोयले से अपनी छत की दीवारो पे बहुत बड़ा सपना लिख दिया उसके बाद एक दिन हम अपनी घर की छत पर थे तो देखा भैया अपने पैंट उतार कर धोबी की तरह छत पर जोर जोर से ज़मीन पर मार रहे थे, तोड़ देर बाद देखा तो उसी घर से भी कपड़े को ज़मीन पर पटकने की आवाज़ आने लगी . यह सिलसिला 3 दिन तक चला , चोथे दिन आंटी अपनी छत पर थी , भैया भी थे , आंटी भैया से पूछ र्है थी की तेरी पेंट कैसे फट गयी , मैने ज़ोर से चिल्ला कर कहा भैया अपनी पैंट उतर कार छत पर देर तक पटकते है.
उस दीं आंटी ने फिर मुझसे पूंछा की शर्मा अंकल के भी ऐसा होता है, मैने कहा हा वहा से भी कपड़े पटकने की आवाज़ आती है ,
यह सुनकर आंटी को गुस्सा आ गया और फिर भैइया को बहुत डांटा. और नीचे जाकर जीने मे ताला डाल दिया , भैया ने फिर हमारे पिताश्री से शिकायत कर दी की मै उपर पड़ता हू, और यह लोग शोर मचाकर मुझे डिस्टर्ब करते है. उस दिन से हमारे छत पर जाना बंद कर दिया गया………..
धीरे धीरे हम सब भूल गये. सम्प्रयदिक दंगो के बाद हमको भी मज़बूरन वो मोहल्ला छोड़ना पड़ा क्योंकि मुस्लिम बहुलय इलाका था और हम दूसरी जगह शिफ्ट हो गये ……………………………
वक्त अपनी गति से चलता रहा और हम अपनी पढ़ाई मे व्यस्त हो गये. पढ़ने के बाद अपने कम धंदे मे लग गये ………………एक दिन रविवार को एक दूजे के लिए फिल्म का प्रसारण टी.वी पर हुआ . हम उस फिल्म को देखने लगे, जैसे जैसे वो फिल्म आगे बड़ी तो कमाल हसन और रति को लाइट बुझाते – जलाते थे – कपड़े पटक पटक कर धोते देख कर वो भैइया की हरकते याद आने लगी जब भैइया लाइट बुझाते – जलाते थे – छत पर पेंट पटकते थे. जब हम नही समझ पाए थे उनके प्यार के इंडिकेशन को .
आज वो भैइया कहा है हमे कुछ नही पता. लेकिन उनकी यादे मेरे जहन मे आज तक याद ताज़ा है, अनजाने मे हम उनके प्यार मे विलेन बन चुके थे
जब भी उनकी याद आती है तो मै यह फिल्म एक दूजे के लिए जरूर देखता हू. और इस फिल्म के 2 प्रिंट मैने संभाल कर रखे हुए क्योकि यह फिल्म मेरी बचपन की याद से जुड़ी है.


Tags Categories: Yade Posted By: SURENDRA SAXENA
Last Edit: 21 Nov 2009 @ 05 03 PM

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Responses to this post » (11 Total)

 
  1. piano stores says:

    piano stores…

    Megacool Blog indeed!… if anyone else has anything it would be much appreciated. Great website Enjoy!…

  2. Anju Pangty says:

    bachpan nishchal masoom hota hai aur yaad ka jharokha achcha laga…..shukriya.

  3. asha says:

    bachpan ki bahut sari batein aaj bhi chehe per muskaan la deti hain……………..bahut hi sundar film

  4. Asim Saxena says:

    Good

  5. geetasharma says:

    I too love this movie…………..

  6. waah .. aisa hi hota hai bachpan..!!!!!1

  7. Tipntop says:

    Bachpan ki nadan shataniya bahut hi mazedar hoti, jinhe yad karke hansi aa hi jati hai. Surendra ji ne yado ka jarokhe se hamko apne bachpan ka manornajak anubhav bata, lekin desh ki us vaytha ko bhi, ek hi sentence mai kah gaye , jiska dhyan ham blog dosto ka dhyan hi nhi gaya ………….
    Communal Riots ke baad aisa palayan aksar dekhne ko milta hai , Godhra, Mumbai bam kand ke bad palayan Jammu Kashmir se pandito ka palayan , 1984 mai Delhi se sikho ka palayan, Jo bhogta hai vahi janta hai …………………

  8. Tipntop says:

    Bachpan ki nadan shataniya bahut hi mazedar hoti, jinhe yad karke hansi aa hi jati hai. Surendra ji ne yado ka jarokhe se hamko apne bachpan ka manornajak anubhav bata, lekin desh ki us vaytha ko bhi, ek hi sentence mai kah gaye , jiska dhyan ham blog dosto ka dhyan hi nhi gaya …………as written —> sampraydik dango ke bad hamko bhi vo mohalla chorna pada kyonki muslim bahulya ilaka tha aur ham dusri jagah shift ho gaye <——- kitni vedna hui hogi yeh likhte samay….
    Communal Riots ke baad aisa palayan aksar dekhne ko milta hai , Godhra, Mumbai bam kand ke bad palayan Jammu Kashmir se pandito ka palayan , 1984 mai Delhi se sikho ka palayan, Jo bhogta hai vahi janta hai …………………

  9. Shashi says:

    wowowow… kitni khoobsurat yaad hai…….:)

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  10. jagdis says:

    bachpan ka maza hee kuchh aur hota hai yaar.

  11. Mukesh Gupta says:

    wah……kya baat hai………aapki itni interesting bachpan ki yadon ko sunkar bada achha laga……..aur aapke bhaiya ka wo filmi andaz me signal dena bahoot khoob……….kya kahne………par ek baat hai aapke bhaiya ne bhi aapse khoob badla liya……..

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