



पिछले ब्लॉग मे, मेने एक गुस्ताखी की
जो की सिर्फ एक मज़ाकिया तोर पे कथा लिखी थी
वैसे सबने इसको मज़ाक के रूप मे ही लिया
उत्साह वर्धन के लिए मै
गोपी जी, ओम भाई , मुकेश भाई, असीम ji , ऱाज़ मिश्रा जी, सारा जी, आशा जी, राधा जी , PM प्रोफ. अस्ट्रो जी का तहे दिल से आभारी हू. उन सबका भी धन्यबाद देता हू जिन्होने मेरे ब्लॉग को देखा है और पढ़ा है और एंजाय भी किया होगा.
एक बार फिर कहना चाहता हू की मेने किसी भी पतिदेव को उल्लू नही माना है. आप सब पतिदेव तो वाकई शेर हो, अपनी हुकूमत जो चलाते हो
बस अब मेने कुछ नही कहना
क्योंकि मै सब पतिदेव को शेर मानता हू …………………………………………………….
लेकिन ………………….लेकिन………………….लेकिन………………
जंगल का राजा शेर, जो सब पर हुकूमत करता है वो भी बेचारा , आखिर ……………………………………………………………………
शेरनी से तो डरता ही है.




भक्त जनो
एक समय की बात है , एक दिन मा लक्ष्मी देवी का वाहन उल्लू, देवी से रूठ गया, उसको मनाने की सबने कोशिश करी , लेकिन उल्लू नही माना, जब लक्ष्मीजी को पता चला तो वो उल्लू को मनाने लगी, लेकिन उल्लू , तो उल्लू ठहरा , नही माना, तब लक्ष्मी जी ने उससे बड़े आग्रह पूर्वक पूछा क्यो नाराज़ हो ? , तो उल्लू बोला “ माता – सब आपकी पूजा करते है , सब देवताओ के पूजा के साथ साथ उनके वाहन की भी पूजा होती, लेकिन मेरी पूजा कोई नही करता , बस मेरी यही दुविधा है” | माता लक्ष्मी बोली अरे इतने सी बात पर नाराज़ हो गया | चल मै तुझे वरदान देती हू की , अब से हर साल , मेरी पूजा से ठीक 11 दिन पहले , तुमहारी पूजा होगी, और उस दिन सब उल्लू पूजे जाएंगे …………
तभी से दीवाली पूजन से पहले उस दिन को…………………………………..
करवा चोथ के नाम से मनाया जाता है .


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