02 Dec 2009 @ 3:09 PM 

सामाजिक नियम,प्रथाओ और बंधनो के कारण भारतीय समाज आपनी गरिमा बनाए हुए है- लेकिन पशिचमी सभ्यता के अवगुणो को अपना कर आधुनिक समाज के युवा , परंपरा को तोड़ने मे आपने शान समझने लगे है, प्रथाए टूट रही है, परंपरा खंडित हो रही है-
ऐसे ही आज प्रेम का मतलब सिर्फ वासनाओ की पूर्ति से लगाया जाने लगा है, पहले प्रेम का इज़हार करते करते समय गुजर जाता था, लेकिन आज प्रेम एक स्वीट आइटम की तरह हो गया है, पसंद आ जाए तो ठीक वरना नापसंद करते देर नही, आजकल प्रेमी प्यार के सहारे, प्रेमिका का तन चाहता है और प्रेमिका तन के सहारे प्यार पाना चाहती है, दोनो अपने इच्छा की पूर्ति के लिए प्रेम विवाह का फ़ैसला लेते है, और यह एक तरह से उचित भी है- आजकल प्रेम विवाह तो कॉमन हो गये है- प्राचीन काल मे प्रेमविवाह को प्रोत्साहन दिया जाता था लेकिन धीरे धीरे जाति प्रथा के चलन के कारण इसमे कड़वाहट आ गयी और प्रेमविवाह को सामाजिक दृष्टि से हेय समझा जाने लगा, सामाजिक प्रथाओ और परंपराओ को तोड़ा जाता है तो समाज उसे आसानी से मान्यता नही देता, और ना है आसानी से स्वीकार कर पता है ……..
वैसे भी विवाह एक सुनिश्चित व्यवस्था है जो सभी धर्मो और वर्गो मे लागू होती है, पुरानी कहावत के अनुसार – विवाह तो स्वर्ग मे तय होते है – ईश्वर ने जोड़ी , पहले से ही तय कर दी है, इंसान के हाथ मे कुछ नही है, कितनी ही कोशिश कर ले, लेकिन रिश्ता वही होता है , जहा ईश्वर को मंजूर होता है, विवाह – जीवन की एक नयी शुरुआत होती है, वास्तव मे वेवाहिक रिश्ते की बुनियाद परस्पर समझ और विश्वास पर केंद्रित होती है, फिर भी मन मे एक यक्ष प्रश्न उठता है की जिसे हम प्यार करते है उस से विवाह करना चाहिये या नही ? क्या प्रेम विवाह सफल हो पाएगा ? क्योंकि प्रेमिका को पत्नी बनाया नही की प्रेमिका का आकर्षण खत्म हो जाता है, प्रेमी , पति बना नही की पति का भी आकर्षण खत्म हो जाता है, जब प्रेमी पति बनता है तो प्रेमिका को लगता है की आकर्षण खो गया है, विवाह के बाद सब कुछ निश्चित हो जाता है, आसमान मे उड़ने वाले, प्रेमी-प्रेमिका को वेवाहिक बंधन मे बंधने के बाद ज़मीनी हकीकत से रूबरू होना पड़ता है, ज़िम्मेदारिया उनके चारो तरफ मडराने लगती है, और प्रेम इन सब मे गुम हो जाता है, यदि प्रेम की माँग की पूर्ति नही हुई तो कलह – झगड़ो की शुरुआत हो जाती है.
प्रेम मात्र वासना की पूर्ति का साधन नही , प्रेम एक पूजा है,
प्रेम का मतलब है – पल पल मे जीना , इसका अहसास और अनुभव केवल वर्तमान मे ही किया जा सकता है, इसका भविष्य सुनिश्चित नही होता, आज के पल मे यदि प्रेम जीया गया है तो कल गहरा जाएगा, लेकिन यह अनिश्चित है, प्रेम एक ऐसा फूल है जो सुबह खिलता है , सांझ होते ही मुरझा जा जाता है आजकल जब लड़के लड़किया एक दूसरे से मिलते है तो वे अभिनय कर रहे होते है, वे अपने चेहरे दिखा तो रहे होते है परंतु अपनी असलियत नही, उनके प्रेम की बुनियाद जूठ पर टिकी होती है, सीधे शब्दो मे कहा जाए तो दोनो ही एक दूसरे को फंसा रहे होते है, लड़का –प्रेमिका को इंप्रेस करने के लिए , किसी की बाइक / कार माँग कर , प्रेमिका को घूमाता है, उधार के पैसे माँग कर महगे शॉपिंग माल और होटल मै ले जाकर प्रेमिका को खुश करता है, प्रेमिका भी , अपने प्रेमी को गुमराह करती है, गाड़ी की सर्विस करने वाला मेकेनिक भी ग्राहक की नई कार् ले जाकर प्रेमिका को अपने को बहुत बड़ा इंजिनियर ही बताता है, और प्रेम मे अंधी प्रेमिका भी कार् मे घूमने के बाद असलियत जानने की कोशिश ही नही करती, जब प्रेमविवाहा के बाद, जब सच का सामना होता है तो ……………..दिल के अरमा आँसू मे बह जाते है.
प्रेमी जब अपनी ड्रीम गर्ल को बरतना मलते देखेगा तो उसे प्रेमिका नज़र नही आएगी जो उठकर तुरंत प्रेम प्रदर्शित करेगी ऐसे ही जब लड़का मेहनत करके घर वापिस आएगा तो उसके शरीर से फ्रेंच पर्फ्यूम की महक नही आएगी - तन से पसीने की गंध आएगी, और यह सहन करना ही होगा. प्रेम प्रद्रशित करने मे जो पैसे पिज़्ज़ा , आइस क्रीम , कोल्ड ड्रिंक, मह्न्गे होटेल , शॉपिंग माल , रेस्टोरेंट मे खर्च होते थे, वो बंद हो जाते है, यदि दोने ने ऐसी परिस्थितयो से अड्जस्टमेंट कर लिया तो सोने पे सुहागा, वरना ………..जिंदगी बोझ बन जाने मे देर नही लगती.
क्या प्रेम विवाह सफल हो पाएगा ? यह चिंतन हर मा बाप और परिवार के सदस्यो को होता है,
प्रेमविवाह करने वाले केवल अपनी दृष्टि से सोचते है, अभिभावक की दृष्टि से नही, वे आपने बड़े बुजर्गो की नाराज़गी दूर करने का प्रयास नही करते , उल्टे उनपर इल्ज़ाम लगाते है की उन्होने हमारे साथ अच्छा व्यवहार नही किया और हमसे संबंध तोड़ लिया, वे यह नही सोचते की उनके माता-पिता की भी कुछ अभिलाषा थी, उन्होने भी सपने देखे थे जिन्हे इन्होने तोड़ दिया, प्रेम के चक्कर मे वो अपना कॅरियर भी खत्म कर लेते है, माता –पिता के विरोध करने पर, लड़की या लड़का मरने की धमकी या घर से भागने की धमकी देकर इमोशनली ब्लॅकमेल करके, माता पिता को मजबूर कर देते है, उन्हे अपने मा बाप के स्वास्थय से भी कोई मतलब नही होता, उन्हे सिर्फ अपनी खुशियो से ही मतलब होता है. ऐसे मा बाप अंदर ही अंदर घुट घुट कर रोग ग्रसित हो जाते है. विवाह से केवल लड़के या लड़की का नाता नही जुड़ता बल्कि दो परिवारो से नाता जुड़ता है, जिससे समाज मे एक ताकत बनती है, महज अपना रिश्ता जोड़ने के लिए , पुराने रिश्ते को नहो तोड़ना नही चाहिए
नयी पीडी अपने पूर्वजो के महान उद्धेस्यो को समझे , अपने माता पिता की भावनाओ को समझे ताकि वे अपने माता –पिता को सुखी बना सके और स्वयं भी सुखपूर्वक रह सके. प्रेम विवाह कोई गुनाह नही लेकिन थोड़ा सयम से काम ले तो दोनो परिवारो की गरिमा बनी रहती और समाज उसे स्वीकार करता है. प्रेम एक पूजा है, सयम इसकी विशेषता है, त्याग प्रेम का कर्म है और प्रेमविवाह ग्रह्स्थ जीवन की व्यवस्था है.

Tags Categories: Love Posted By: SURENDRA SAXENA
Last Edit: 02 Dec 2009 @ 04 01 PM

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