28 Nov 2009 @ 1:30 PM 

मेरे जीवन का अधिमान बनना है मुझको इंसान
नही है यह इतना आसान
क्योंकि मैं इतना नादान
कब वह शुभ दिन आएगा
जब सपना सच हो जाएगा
दुनिया मे आने का मेरा
प्रायोजन सफल हो जाएगा
लेकिन मुझको भास नही
इतना मुझको ग्यान नही
कही तो मै कुछ कर जाता
इंसान थोड़ा बन जाता
कोई प्रेरणा साथ नही
फिर भी मन को भास नही
सवकर्मो पर देना ध्यान
यही बचा है बस एक ही ध्यान
मेरे जीवन का अधिमान
बनना है मुझको इंसान

Tags Categories: Philosophy Posted By: SURENDRA SAXENA
Last Edit: 28 Nov 2009 @ 01 36 PM

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 28 Oct 2009 @ 1:08 PM 

देखकर उसके बिखरे बाल
मै सहम सा गया
फटी –फटी सी आँखे
खोफनाक नज़र आ रही थी
जैसे किसी खतरनाक पागल की
लाख कोशिश करके भी
नही गिन पा रहा था
उसके चेहरे पर पड़ी
खरोंचो को
क्योंकि अब तक
बचता- बचता आया हू
आपने आप को
इस तरह के खोफनाक चेहरो से
फिर भी
साहस करके मेने पूछा
कोन हो तुम?
दबी जुबान से वो बोली
“ जिंदगी हू मै “

Tags Categories: Philosophy Posted By: SURENDRA SAXENA
Last Edit: 28 Oct 2009 @ 01 15 PM

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