The New Beginning

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एक सच

March 27, 2010 By: Mukesh Gupta Category: Blogs

यह एक सच है…………

रोजाना जो खाना खाते हो वो पसंद नहीं आता, उकता गए?………..थोडा पिज्जा कैसा रहेगा.

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नहीं? ओके………..पास्ता?

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नहीं?……….इसके बारे में क्या ख्याल है?

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आज ये खाने का भी मन नहीं?
ओके…..क्या इस मेक्सिकन खाने को आजमायें?

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फिर से नहीं………..कोई बात नहीं, हमारे पास कुछ और विकल्प मौजूद है.
ह्म्म्मम्म………..चाइनीज़ ?

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बर्गर्स…..?

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ओके भारतीय खाना चाहिए……..?
दक्षिण भारतीय या उत्तर भारतीय?

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जंक फ़ूड का मन है?

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हमारे पास अनगिनत विकल्प है?
शाकाहार?

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मांसाहार?

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या कुछ और?

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आप इनमे कुछ भी ले सकते हैं? या इन सब में से थोडा-थोडा.


मगर इन लोगों के पास विकल्प नहीं है.

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इन्हें तो बस थोडा सा खाना चाहिए, ताकि जिंदा रह सकें.

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इनके बारे में अगली बार तब सोचना जब आप किसी कैफिटेरिया, होटल या शादी में यह कह कर खाना फेंक रहे हों कि स्वाद नहीं हैं. 

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इनके बारे में अगली बार सोचना जब आप यह कह रहे हों…..यहाँ की रोटी इतनी सख्त है कि खायी नहीं जाती….

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               कृपया खाने का अपव्यय को रोकिये
अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी/समारोह हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप 1098 (केवल भारत में) पर फ़ोन करें, यह मजाक नहीं है, यह एक चाइल्ड हेल्प लाइन है. वे आयेंगे और भोजन एकत्रित कर ले जायेंगे.

कृपया इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें इससे उन बच्चों का पेट भर सकता है.

हम दोस्तों को गंदे जोक्स, स्पाम मेल नेटवर्क में भेजते हैं, क्यों न इस बार एक अच्छे सन्देश को आगे फॉरवर्ड करें ताकि इन बच्चों का कुछ भला हो सके.

“मदद करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होठों से अच्छे होते हैं. “

भगवान की तस्वीरें फॉरवर्ड करने से किसी को गुडलक मिला या नहीं, मालूम नहीं पर एक सन्देश अगर भूखे बच्चे तक खाना फॉरवर्ड कर सके तो यह ज्यादा बेहतर है.


कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है

March 20, 2010 By: Mukesh Gupta Category: Poetry

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है,
मंजिल जितनी दूर सही, पर पास हमें दिखती है,
कोशिश करना धर्म हमारा, चाहे जो हालत सही,
कदम बढ़ाएंगे आगे, झुकना हमने सीखा ही नहीं, 
कोशिश भी पुरे मन से हो, जैसे चींटी करे प्रयास, 
जीव बहुत ही छोटा है, पर भरा लबालब है विश्वास, 
बार-बार गिरती पड़ती है, चाहे रस्ता हो दुश्वार, 
सुस्ताने का नाम नहीं है, कोशिश करती बारम्बार, 
नियति को झुकना ही होगा, चींटी पहुंचे मंजिल द्वार, 
हम मानव सीखें चींटी से, जो है कोशिश का अवतार

एक बार यदि असफल हो गए, तो यह अंत नहीं है,
सोचो! क्या कुछ कमी रह गयी? जो हम सफल नहीं हैं, 
फिर नयी कोशिश, नयी शुरुआत, कोशिश पुरे मन से, 
अबकी बार न चूक होगी, पूर्ण प्रयास करें मन से,
कुछ भी नहीं असंभव जग में, सब कुछ पा सकते हैं,
इश्वर मदद करे उनकी, जो स्वयं मदद करते हैं,
शर्त यही है कोशिश मन से, लक्ष्य पर केन्द्रित हों,
कोई कसर रह जाये न बाकी, कर्म-लक्ष्य शामिल हों,
अबकी बार जीत निश्चित है, मेहनत रंग लाती है,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है. 

कभी-कभी होता है ऐसा, वंचित फल नहीं पाया,
आस लगाये बैठे थे जिसकी, वह परिणाम न आया,
कारन जो भी हों इसके, इतना तो निश्चित है,
मेहनत व्यर्थ नहीं जाती है, फल मिलना निश्चित है,
देर भले हो जाये मान लो, अंधेर नहीं होना है,
हिम्मत कभी न हारो, उठ जागो तभी सवेरा है,
कोशिश करनी ही होगी, यदि सफल तुम्हे होना है,
भाग्य भरोसे रहकर तो जीवन सबने जीना है,
वास्तविकता है यही, रात के बाद सुबह होती है, 
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है. 


एक

January 22, 2010 By: Mukesh Gupta Category: Blogs

जातिवाद, क्षेत्रवाद ऐसे शब्द हैं जो एक इंसान को दूसरे इंसान से अलग करता है. इसी के चलते कभी आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों के साथ भेदभाव किया जाता है, कभी मुंबई में उत्तर भारतीयों को मारा जाता है तो कहीं इसी भेदभाव के चलते हिन्दू-मुसलमान के बीच दंगे फसाद होते हैं. आखिर ये इंसान क्यों नहीं समझते की सब इंसान एक ही जैसे हैं, ये धरती जितनी उनकी है उतनी ही दूसरों की भी है. जिस दिन इंसान ये बात समझ लेगा की वो ना कोई आस्ट्रेलियन है ना कोई भारतीय, ना कोई महाराष्ट्रियऩ है ना कोई उत्तर भारतीय, ना कोई हिन्दू है ना कोई मुसलमान, सिर्फ एक इंसान है सिर्फ एक इंसान उस दिन ये दुनिया स्वर्ग बन जाएगी.
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क्यों रूठे हम और तुम,
क्यों उदासी छाई है,
हम सबके बीच क्यों ये लड़ाई है,
देखो तो चारों ओर
,
हंसी है, खुशियाँ हैं,
हमने ये कैसी आग लगाई है,
दो दिन का जीवन फिर चले जाना है,
लड़कर या रोकर, किसने क्या पाना है,
एक हम, एक जान, एक सूर्य और एक चाँद,
एक दर्द, एक खुशी, एक आसूँ, एक जहान, 

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मेरा नहीं तेरा नहीं,
सब कुछ हमारा है,
एक ईश्वर का हमें सहारा है,
बाँटकर खुशियाँ जिओ,
मिलकर तुम रहो,
हाथों मे हाथ दो, ये समय तुम्हारा है,
पल भर का जीवन, बरसों में पाना है,
ये मौका फिर से वापस ना आना है
,
एक हम, एक जान, एक सूर्य और एक चाँद,
एक दिल, एक मंज़िल, एक राह, एक कारवाँ,
एक चाह, एक प्यार, एक शीत और एक बाहर,
एक भूख और एक दर्द, एक आँसू, एक जहान,

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एक ही धरती, एक ही माटी, एक ही स्वर हैं एक ही दिल के,
नफरतों में खों ना जाए, घर बनाएँ, आओ हम मिलके,
एक हम, एक जान, एक सूर्य और एक चाँद,
एक दर्द, एक खुशी, एक आसूँ, एक जहान.


Superstition and Science

November 24, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Science

अंधविश्वास और विज्ञान


अंधविश्वास और विज्ञान के बीच जंग तब से चली आ रही है जब से इंसान ने सोचना शुरू किया है और इस जंग की मुख्य वजह हैं अंधविश्वास और विज्ञान की अलग-अलग सोच. अंधविश्वास जो मानता है उसी में अटल रहता है चाहे वो सही हो या नहीं, विज्ञान उसी को मानता है जिसका प्रमाण उसके सामने होता है. अंधविश्वास ने जब-जब विज्ञान के सामने चुनौतियाँ रखीं हैं, विज्ञान ने उसका सामना करते हुए अंधविश्वास को झुठलाकर अपनी बात का प्रमाण दिया है और विज्ञान ने जब-जब अंधविश्वास की बात को गलत साबित की है, अंधविश्वास ने उसकी खूब आलोचना की है. अंधविश्वास और विज्ञान के बीच की इस जंग के सैंकड़ों उदाहरण दुनिया में मिल जाएंगे, पर सभी का ज़िक्र यहाँ कर पाना संभव नहीं है.
आज तक माना जाता है की सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण में राहु और केतु का हाथ है और ऐसा होने पर घोर विपदा आती हैं, आज भी कई लोग ग्रहण होने पर डर के मारे घर से बाहर नही निकलते पर विज्ञान ने साबित कर दिखाया है की महज एक खगोलीय घटना है और कुछ नहीं. इसी तरह कहा जाता रहा है की इंसानो और जानवरों को जीवन ‘ऊपर वाला’ देता है, जीवन खत्म होता है आत्मा नहीं, एक शरीर के खत्म होने पर आत्मा दूसरा शरीर धारण करती है…….इत्यादि. पर विज्ञान के ज्ञान को देखकर इन बातों पर भी संदेह होने लगा है. विज्ञान ने जिस तरह टेस्ट ट्यूब बेबी, क्लोनिंग, सेरोगैसी इत्यादि पद्यति के जरिए जीवन उत्पन्न करके दिखाया है, वह सोचने को मजबूर करता है, या हो सकता है इन सब वैज्ञानिक पद्यतियों के ज़रिए जिंदगी के निर्माण करने में ‘उसी’ का हाथ हो अगर ऐसा ही है तो फिर इन सब बातों को लेकर समाज में इतना हो-हल्ला क्यों? या ये भी हो सकता है की वैज्ञानिक लोग जादू-टोना जानते हों और आत्माओं को पकड़-पकड़ कर इस तरह के जीवन का निर्माण कर रहे हों…………..खैर ये तो मज़ाक की बात हुई पर ये सोचने वाली बात है की क्या जो अब तक माना जाता रहा है क्या वो गलत था? क्या वो सब बेसिर-पैर की बातें महज़ थी?
पर आखिर ये अंधविश्वास फैलता कैसे है? अंधविश्वास है क्या? मेरा मानना है की अंधविश्वास ‘अफवाह’ का ही एक रूप है जिस तरह अफवाह एक कान से दूसरे कान फैलती है उसी प्रकार अंधविश्वास भी तभी फैलता है जब उसे किसी के कान में डाला जाए. इसी बात पर एक कहानी कहना चाहता हूँ……….
एक आलसी आदमी जो हमेशा ऐसा काम चाहता था जिससे उसे बैठे-बिठाए सब कुछ मिल जाए पर जब उसे ऐसा कोई काम ना मिल सका तो वो एक पहुँचे हुए साधु-महात्मा से उपाय पूछने गया. वे समझ गये की ये बहुत आलसी इंसान है इसे सबक सीखाना चाहिए तो उन साधु-महात्मा ने उस आदमी से कहा की जाओ मैं तुम्हे वरदान देता हूँ की तुम आज के बाद जो कुछ मांगोगे वो तुम्हारे सामने आ जाएगा पर एक बात का ध्यान रखना जब भी कुछ माँग रहे होगे तो किसी बंदर का ख्याल अपने मन में ना लाना नहीं तो तुम्हारी इच्छा पूरी नहीं होगी. यह सुनकर वो खुश हो गया की अब उसे जो चाहे वो मिल जाएगा. पर उसे कुछ ना मिला क्योंकि जब भी वो कुछ माँगने की सोचता उसे साधु-महाराज की बात याद आ जाती की बंदर के बारे में नही सोचना और अनजाने में ही उसे बंदर का ख्याल आ जाता. वो ज़िंदगी भर यही सोचता रहा की उसे सब कुछ मिल सकता था पर एक बंदर की वजह से नही मिला.
अब आप सोचिए अगर उन साधु-महात्मा ने अगर उस आदमी को बंदर के बारे में न सोचने की हिदायत न दी होती तो वो एक पल के लिए भी बंदर का ख्याल मन में न लाता. उसी तरह जब तक कोई हमारे कानों में कोई बात नही डालता हम उस बारे में सोचते तक नही. जैसे जब तक किसी को ये न कहा जाए की बिल्ली के रास्ता काटने से बुरा होता है तो वो कभी भी अपने किसी काम के बिगड़ने पर बेचारी बिल्ली को दोष न दे. जब तक किसी बच्चे को ये ना बताया जाए धर्म-जाति क्या होती है किसी की क्या मजाल जो वो धर्म-जाति के नाम पर लड़ मरे. मुझे तो डर है कहीं अंधविश्वास के चक्कर आज से सैकड़ों साल बाद किसी सिरफिरे के कहने पर कहीं “हैरी पॉटर” को भगवान राम की तरह ही भगवान मानकर न पूजा जाने लगे क्योंकि आज जिस तरह हैरी पॉटर की किताबें छपती हैं अगर भविष्य में कोई सिरफिरा ये कह दे की आज के यानि हमारे ज़माने में हैरी पॉटर का वजूद था तो उस समय इस बात को नकारने का कोई प्रमाण नहीं होगा और एक और अंधविश्वास का जन्म हो जाएगा.


Untitled

November 23, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Science


Give me some sunshine

November 21, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Music

A Latest Song from the Movie “3 Idiots”

“सारी उम्र हम मर-मर के जी लिए,

इक पल तो अब हमें जीने दो, जीने दो,”

सारी उम्र हम मर-मर के जी लिए,
इक पल तो अब हमें जीने दो, जीने दो……..2

Give me some sunshine,

Give me some rain,

Give me another chance,

I wana grow up once again………….2


“कंधों को किताबों के बोझ ने झुकाया,
रिश्वत देना तो खुद पापा ने सिखाया”
“99% मार्क्स लाओगे तो घड़ी, वरना छड़ी”
“लिख-लिख कर पड़ा हथेली पर अल्फ़ा, बीटा, गामा का छाला,
Consentrated H2SO4 ने पूरा………..पूरा बचपन जला डाला”

बचपन तो गया, जवानी भी गयी,
इक पल तो अब हमें जीने दो, जीने दो………2

सारी उम्र हम मर-मर के जी लिए,
इक पल तो अब हमें जीने दो, जीने दो……..

Give me some sunshine,

Give me some rain,

Give me another chance,

I wana grow up once again………….2

(To listen whole songe buy origional CD of 3 Idiots……Stop Piracy)


2012 End of the world

November 04, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Science

2012 दुनिया का अंत


आजकल हर न्यूज़ चेनल्स, अखबारों और इंटरनेट की दुनिया में एक बहस ने लोगों की धड़कने बढ़ा दी है. यह बहस है उस कथित भविष्यवाणी पर, जिसमे कहा गया है की सन 2012 में इस धरती से इंसानों का नामोनिशान मिट जाएगा. 21 दिसंबर 2012 को एक एस्टेरोयड धरती से टकराएगा. नतीजन भयानक भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और सुनामी जैसी आपदाओं से भारी विनाश होगा. यह विनाश इतना भयानक होगा की पृथ्वी से ज़िंदगी खत्म हो जाएगी.

http://www.2012warning.com/
दरअसल बहस की मुख्य वजह है करीब 250 से 900 ईसा पूर्व माया नामक सभ्यता. खोजकर्ताओं ने इस सभ्यता के कुछ अवशेष मेक्सिको, पश्चिमी होंडूरास और अल सल्वाडोर आदि इलाक़ों में ढूंढे हैं. माना जाता है की माया सभ्यता की वाशिंदों को मेथेमेटिक्स, एस्ट्रोनॉमी और लेखन के क्षेत्र में बहुत जानकारी थी. ये लोग जिस कैलेंडर का इस्तेमाल करते थे, वह 21 दिसंबर 2012 को खत्म हो रहा है. माया सभ्यता के लोग मानते थे की जब इस कैलेंडर की तारीख़े खत्म होती हैं, तो धरती पर प्रलय आता है और नये युग की शुरुआत होती है. कहीं-कहीं यह भी चर्चा है की 14वीं सदी के फ्रांसीसी भविष्यवक्ता “ग्रेट माइकल द नास्ट्रेडायमस ने भी 2012 में धरती के खत्म होने की भविष्यवाणी की थी.
धरती के खत्म होने का मुख्य कारण प्लेनेट एक्स निबिरु नामक एक एस्टेरॉयड बताया जा रहा है जो दिसंबर 2012 में धरती से टकराने वाला है. और ये वैसी ही होगी, जिससे पृथ्वी से डायनोसोर का नामोनिशान मिट गया था. इसके अलावा हमारी आकाशगंगा (गैलेक्सी) मिल्की-वे के ठीक मध्य से सूर्य अलाइन करेगा. यह 26 हज़ार साल में पहली बार होगा. इससे बेतहाशा एनर्जी निकलेगी, जिससे धरती अपनी धुरी से भी हट सकती है.
पर दुनिया भर के जाने माने साइंटिस्ट 2012 मे किसी एस्टेरॉयड के धरती से टकराने की आशंका से इनकार कार रहे हैं. भारत के मशहूर साइंटिस्ट अमिताभ पांडे का कहना है की अब तक ऐसे किसी भी ग्रह या उल्के का पता नहीं चला है, जो धरती से टकरा सकता है. धरती के खत्म होने की अफवाहें सिर्फ डर फैलाने की कोशिश है. कभी ब्लैक हॉल के नाम पर तो कभी महामशीन के नाम पर कहा जाता रहा है की पृथ्वी खत्म हो जाएगी. नासा के प्रमुख साइंटिस्ट डॉ. डेविड मॉरिसन का भी यही कहना है की प्लेनेट एक्स निबिरु नाम के जिस ग्रह की 2012 में धरती से टकराने की बात की जा रही है, उसका कहीं अस्तित्व नहीं है.
दुनिया में हज़ारों-लाखों एस्ट्रोनॉंमर अपनी दूरबीन लिए आसमान खंगालते रहते हैं. अगर ऐसा कोई ग्रह होता तो किसी ना किसी की नज़र में तो आता. आप किसी ग्रह को कहीं छिपाकर तो नहीं रख सकते. जहाँ तक माया सभ्यता के केलेंडर की बात है. ये ज़रूरी नहीं कि जो उन लोगों का मानना हो वो सही हो. मैं मानता हूँ कि नासट्रेडायमस एक महान भविष्यवक्ता थे, उनके द्वारा की गई भविष्यवाणियों के बारे में मैने भी पढ़ा है और उनमें कई भविष्यवाणी तो सचमुच चौंकाने वाली हैं. पर दिसंबर 2012 को लेकर उन्होंने कोई भविष्यवाणी की थी इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं है. ये तो लोगों द्वारा इस अफवाह को नासट्रेडायमस के साथ जोड़ा जा रहा है.
दरअसल सोचा जाए की इंसान ऐसी बातों को इतनी तवज्जो क्यों देता है, कभी महामशीन से डर तो कभी किसी भविष्यवाणी से. मेरा मानना है की ये इंसान की फितरत है. हर नई चीज़ जो उसने कभी देखी-सुनी ना हो को देखकर उसे अपनी पिछली मान्यताओं जिसको वो अब तक मानता आ रहा है के झुठलाए जाने का डर रहता है. और ऐसा अक्सर देखा भी गया है. जब महान एस्ट्रोनॉंमर गैलिलियो ने दुनिया को बताया था की पृथ्वी और अन्य ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते हैं न की सूर्य, पृथ्वी के तो हर तरफ उसकी आलोचना हुई थी. क्योंकि लोगों का मानना था की पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में है और सूर्य व अन्य ग्रह उसकी परिक्रमा करते हैं. और गैलिलियो की इस खोज से उनकी धार्मिक मान्यताएँ झुठलाई जा रही थी. इस कारण उन्होनें गैलिलियो को पागल, सिरफिरा और न जाने क्या-क्या कहा. अब दुनिया के अंत के इस अफवाह में कितनी सच्चाई है ये तो वक़्त ही बताएगा.


Love

October 29, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Love

ढाई आखर प्रेम का


तेरी……….मेरी…………सबकी कहानी,
ढाई…आखर…..रब कि निशानी,

दो मन अनजाने खिचें, बरबस ही मिल जाये |
अदभुत शक्ति प्रेम की, जो जाने सो पाये ||

नाता अजब है प्रेम का, कितने भी हों दूर |
बढ़े निकटता आप ही, चाह मिलन भरपूर ||

गुण अवगुण परखे बिना, अपना जो हो जाए |
मिलते मन अनायास जब, प्रेम वही कहलाए ||

व्यक्त होते नहीं शब्द में, प्रेम के बोल अबोल |
नयन कहत मन सुनत हैं, अंतर के पट खोल ||

रिश्ता नाता प्रेम का, बिना छुए जुड़ जाये |
एक जनम की क्या कहें, अनंत जनम सिरजाये ||

कहना चाहे मन बहुत, भूल जाए पिय देख |
दशा अनोखी प्रेम की, सत्य कहे मन लेख ||

मूड मूड पिय को देखना, लाज लगे हस देय |
अनुभव मीठे प्रेम के, हसे फसे सो लेय ||

जाने पर कह सके नहिं, प्रेमी प्रेम का रोग |
लाख छुपाए फिरत पर, भेद खोलते लोग ||

रहे दूर मन में बसे, पास लगे बहु दूर |
प्रेम का मंतर तोड़ता, अंतर का दस्तूर ||

प्रेम ढिंढोरा ना पीटीये, परख लीजिये साज़ |
वाणी कुछ ना कहत पर, नयन खोलते राज़ ||

डगर सुहानी प्रेम की, जहाँ ठगी ना होय |
ठगी होय जिस डगर पर, प्रेम डगर न सोय ||

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाए |
जोड़े से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परि जाए ||

कहना मन सब चाहता, सबसे रहा छुपाय |
अनजाना अनकहा ये, नाता प्रेम कहाय ||

जीवन के हर मोड़ पर, प्रेम प्रेरणा देत |
हित की बात करे सदा, बदले कुछ ना लेत ||

परिभाषा बहु प्रेम की, देश काल अनुसार |
अर्थ न बदला प्रेम का, बदला सब संसार ||

क्या उपमा दूँ प्रेम को, प्रेम प्रेम कहलाय |
यदि उपमा दूँ प्रेम को, प्रेम झूठ हो जाय ||

प्रेम है इक आराधना, सफल साधना ग्यान |
बिना प्रेम की सत्य कहे, सफल नही इंसान ||

पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया ना कोय |
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय ||

तेरी……….मेरी…………सबकी कहानी,
ढाई…आखर…..रब कि निशानी.


Darr

October 26, 2009 By: Mukesh Gupta Category: MY THOUGHTS

डर


डर, खौफ, भय दुनिया में ऐसी चीज़ें हैं हर किसी के अंदर होती है. इस दुनिया में हर किसी को किसी ना किसी चीज़ से डर लगता है. कोई भूत-प्रेत-पिशाचों से डरता है, तो कोई सांप-बिच्छू या दूसरे छोटे-मोटे जानवरों से. किसी को ऊँचाई का भय है तो किसी को आग या पानी का. सबके अंदर कोई ना कोई भय छुपा हुआ है. पर क्यों? आखिर कोई इंसान डरता क्यों है?
लोगों को सांप-बिच्छू और दूसरे जानवरों से डर इसलिए लगता है क्योंकि उन्हें लगता है की वे उनको नुकसान पहुँचा सकते हैं. पर शायद वे जानते नहीं की ये सब नुकसान तभी पहुँचाते हैं जब इन्हें छेड़ा जाए, वरना इन्हें किसी से कोई मतलब नहीं. ये भूत-प्रेत-पिशाच तो लोगों के अंदर का खुद का डर है. लोगों को ऊँचाई से इसलिए डर लगता है कि वे गिर जाएंगे, आग से जल जाने का और पानी में डूब जाने का डर भी लोगों को खूब डराता है.
कुछ लोगों को किसी से डर नहीं लगता सिवाय भगवान के और सही भी है भगवान से कौन नही डरता. सब को भगवान से डर लगता है. पर मैं भगवान से नही डरता, क्योंकि मेरा मानना है कि भगवान किसी का नुकसान नहीं करता और डर उसी से लगता है जिससे किसी प्रकार के नुकसान कि गुंजाइश हो. और अगर “वो” नुकसान करता है तो वो मेरी नज़र में भगवान नहीं. भगवान के लिए हर चीज़ एक समान है फिर वो एक का भला और दूसरे का नुकसान कैसे कर सकता है. कोई भी माँ-बाप अपने बच्चों का नुकसान नही चाह सकता.
पर ऐसा नहीं है कि मैं किसी से नही डरता. मुझे डर लगता है तो अपने आप से क्योंकि अगर मेरा कोई बुरा कर सकता है तो वो कोई और नहीं मैं खुद हूँ. मेरे अंदर एक शैतान, एक जानवर छिपा हुआ है जो कब बाहर आ जाए कोई नहीं जानता, मैं भी नहीं. मैं पूरी कोशिश करता हूँ को वो मेरे अंदर ही रहे, बाहर ना आए क्योंकि अगर वो बाहर आया तो वो सबसे ज्यादा नुकसान मेरा ही करेगा.
दुनिया में डर चाहे सैंकड़ों तरह के हों पर उनसे निपटने का तरीका एक ही है, और वो है हमारा अंतर्मन, हमारा मन जितना मज़बूत होगा अपने डर से मुक्त होने में उतनी ही आसानी होगी. मैं तो बस इतना कहूँगा कि डर का सामना डर से नही हिम्मत से करना चाहिए. डर के सामने जितना डरोगे वो तुम्हें उतना ही डराएगा. डर को डराना है तो हिम्मत को साथ रखें तभी डर को हरा पाएंगे क्योंकि डर के आगे जीत है.

-Mukesh


Read it, Think it, Feel it.

October 21, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Blogs

We love ourselves even after doing many mistakes. Then how can we hate others for their one mistake. Think before you hate someone or hate yourself.

Swimming along the flow is effortless but swimming against it needs effort. Don't go the way life takes you, but take life the way you wanna go. Dare to be different.

The greatest advantage of speaking the truth is that you don't have to remember what you said. Think about it.

A beautiful saying: If your eyes are positive you would like all the people in the world. But if your tongue is positive all the people in the world like you.

Life is about the art of drawing without an eraser, so be careful while taking decisions about the most valuable pages of your life.

A nice thought: I met money and said why everyone runs behind you, you are just a piece of paper. Money smiled and said of-course I am just a piece of paper, but I haven't seen a dustbin yet in my whole life.

Life is like a coin. Pleasure and Pain are the two sides. Only one side is visible at a time. But remember other side is also waiting for it's turn.

If you like someone, show it. It will be sweeter then telling. But if you don't like someone. Just tell it. It will be less painful then showing it.

A very true but strange quote: Love doesn't start in morning & end in evening. It starts when you don't need it & ends when you need it most.

What's greater then mom's love? Which pillow is better then lover's lap? Which company's better then friends? There are some things in life with no substitutes. Love them forever.

Tragedy of moon: So simple but so attractive. So enlightening but so cool. So moving but so still. So quite but so popular. So romantic but still single.

A cute story: A man daily sent a rose to his wife. One day he died, but his wife still received roses. She asked the floweriest. He said, your husband paid advance for your whole life. Moral: Love someone forever

A boy loved a girl so much. One day he proposed her. But she refused. Still he was not sad. His friends asked him, didn't you feel bad? He said, why should I feel? I lost the one who never loved me. But she lost the one who really loves her.


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