एक
जातिवाद, क्षेत्रवाद ऐसे शब्द हैं जो एक इंसान को दूसरे इंसान से अलग करता है. इसी के चलते कभी आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों के साथ भेदभाव किया जाता है, कभी मुंबई में उत्तर भारतीयों को मारा जाता है तो कहीं इसी भेदभाव के चलते हिन्दू-मुसलमान के बीच दंगे फसाद होते हैं. आखिर ये इंसान क्यों नहीं समझते की सब इंसान एक ही जैसे हैं, ये धरती जितनी उनकी है उतनी ही दूसरों की भी है. जिस दिन इंसान ये बात समझ लेगा की वो ना कोई आस्ट्रेलियन है ना कोई भारतीय, ना कोई महाराष्ट्रियऩ है ना कोई उत्तर भारतीय, ना कोई हिन्दू है ना कोई मुसलमान, सिर्फ एक इंसान है सिर्फ एक इंसान उस दिन ये दुनिया स्वर्ग बन जाएगी.![]()
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क्यों रूठे हम और तुम,
क्यों उदासी छाई है,
हम सबके बीच क्यों ये लड़ाई है,
देखो तो चारों ओर,
हंसी है, खुशियाँ हैं,
हमने ये कैसी आग लगाई है,
दो दिन का जीवन फिर चले जाना है,
लड़कर या रोकर, किसने क्या पाना है,
एक हम, एक जान, एक सूर्य और एक चाँद,
एक दर्द, एक खुशी, एक आसूँ, एक जहान,
मेरा नहीं तेरा नहीं,
सब कुछ हमारा है,
एक ईश्वर का हमें सहारा है,
बाँटकर खुशियाँ जिओ,
मिलकर तुम रहो,
हाथों मे हाथ दो, ये समय तुम्हारा है,
पल भर का जीवन, बरसों में पाना है,
ये मौका फिर से वापस ना आना है,
एक हम, एक जान, एक सूर्य और एक चाँद,
एक दिल, एक मंज़िल, एक राह, एक कारवाँ,
एक चाह, एक प्यार, एक शीत और एक बाहर,
एक भूख और एक दर्द, एक आँसू, एक जहान,
एक ही धरती, एक ही माटी, एक ही स्वर हैं एक ही दिल के,
नफरतों में खों ना जाए, घर बनाएँ, आओ हम मिलके,
एक हम, एक जान, एक सूर्य और एक चाँद,
एक दर्द, एक खुशी, एक आसूँ, एक जहान.

Bilkul thik likha mere dost.
1Sach much kitna sach likha hai tumne in panktiyon mein. Kash ye jhgde hamesha ke liye mit jayen. Bahut bahut dhanyavaad Mukesh.
2bahut achche vicharon ko kavita ke maadhyam se sundar dhang se aapne kaha hai…
3ek lambe atral ke bad dosto se hello karne ki punah khavahish hui. hamesha ke tarah bahut accha lekhan he aapka dil se shubhkamnaye..
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