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Archive for the ‘Love’

Love

October 29, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Love

ढाई आखर प्रेम का


तेरी……….मेरी…………सबकी कहानी,
ढाई…आखर…..रब कि निशानी,

दो मन अनजाने खिचें, बरबस ही मिल जाये |
अदभुत शक्ति प्रेम की, जो जाने सो पाये ||

नाता अजब है प्रेम का, कितने भी हों दूर |
बढ़े निकटता आप ही, चाह मिलन भरपूर ||

गुण अवगुण परखे बिना, अपना जो हो जाए |
मिलते मन अनायास जब, प्रेम वही कहलाए ||

व्यक्त होते नहीं शब्द में, प्रेम के बोल अबोल |
नयन कहत मन सुनत हैं, अंतर के पट खोल ||

रिश्ता नाता प्रेम का, बिना छुए जुड़ जाये |
एक जनम की क्या कहें, अनंत जनम सिरजाये ||

कहना चाहे मन बहुत, भूल जाए पिय देख |
दशा अनोखी प्रेम की, सत्य कहे मन लेख ||

मूड मूड पिय को देखना, लाज लगे हस देय |
अनुभव मीठे प्रेम के, हसे फसे सो लेय ||

जाने पर कह सके नहिं, प्रेमी प्रेम का रोग |
लाख छुपाए फिरत पर, भेद खोलते लोग ||

रहे दूर मन में बसे, पास लगे बहु दूर |
प्रेम का मंतर तोड़ता, अंतर का दस्तूर ||

प्रेम ढिंढोरा ना पीटीये, परख लीजिये साज़ |
वाणी कुछ ना कहत पर, नयन खोलते राज़ ||

डगर सुहानी प्रेम की, जहाँ ठगी ना होय |
ठगी होय जिस डगर पर, प्रेम डगर न सोय ||

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाए |
जोड़े से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परि जाए ||

कहना मन सब चाहता, सबसे रहा छुपाय |
अनजाना अनकहा ये, नाता प्रेम कहाय ||

जीवन के हर मोड़ पर, प्रेम प्रेरणा देत |
हित की बात करे सदा, बदले कुछ ना लेत ||

परिभाषा बहु प्रेम की, देश काल अनुसार |
अर्थ न बदला प्रेम का, बदला सब संसार ||

क्या उपमा दूँ प्रेम को, प्रेम प्रेम कहलाय |
यदि उपमा दूँ प्रेम को, प्रेम झूठ हो जाय ||

प्रेम है इक आराधना, सफल साधना ग्यान |
बिना प्रेम की सत्य कहे, सफल नही इंसान ||

पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया ना कोय |
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय ||

तेरी……….मेरी…………सबकी कहानी,
ढाई…आखर…..रब कि निशानी.

My fevorite song

September 07, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Love

पहली नज़र


जब से मिली तुमसे मेरी पहली-पहली नज़र,
रुके ना कदम बढ़के मेरे, ये तो हैं बेसबर,
नज़रों में तुम हो, तुम ही तो हो अब नज़ारों में,
खो ना जाऊँ मैं कहीं, अब तो है बस इतना सा डर,
कुछ कहूँ, कुछ सुनूँ, दिल ये चाहे मेरा,
डरती मेरी धड़कने, जाने क्या होगा इस प्यार का.

लाई ज़िंदगी में तुम मेरी पहली-पहली बहार,
दर्द जगा धड़कन में नया है क्यों ये पहली बार,
चाँद-सितारे आए फलक से तेरे आँचल में,
सांझ-सवेरे दिल रहता है तेरी चाहत मैं,
कुछ कहूँ, कुछ सुनूँ, दिल ये चाहे मेरा,
डरती मेरी धड़कने, जाने क्या होगा इस प्यार का.

Love

September 03, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Love

ऐसा क्यों होता है?


* क्यों कोई इतना प्यारा लगने लगता है कि उसके लिए कुछ भी कर गुजरने को जी चाहता है?
* क्यों किसी को देखने भर से दिल कि धड़कने तेज़ और साँसे धीरे हो जाती हैं?
* दिल बोलना तो चाहता है फिर क्यों ज़ुबान उसका साथ देने से कतराती है?
* क्यों किसी कि खुशी के लिए खुद को दुख देने से भी गुरेज नहीं होता?
* क्यों किसी कि तकलीफ को अपना दिल महसूस करता है?
* क्यों किसी कि खातिर दिल उसे भी पसंद करने लगता है जो उसे कभी पसंद नही आया?
* क्यों किसी को सिर्फ देखते रहने से दिल को सुकून मिलता है?
* क्यों बारिश में बाँहें फैलाए उसकी बूंदों को अपने आगोश में लेने का मन करता है?
* क्यों किसी कि आँखों में हम अपना अक्स ढूँढने कि कोशिश करते हैं?
* क्यों किसी एक का ख्याल हर वक़्त हमारे ज़हन में होता है?
* क्यों उसके द्वारा कही हर छोटी से छोटी बात ता-उम्र याद रहती है?
* क्यों उसके साथ न होने पर तनहाई में रहने का दिल करता है?
* क्यों किसी के दूर जाने से ज़िंदगी में उसकी अहमियत का पता चलता है?

Love

August 25, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Love

एक छोटी सी कहानी


एक अंधी लड़की थी. उसे एक दोस्त के अलावा सब ने ठुकरा दिया था. उसका वो दोस्त उसे बहुत प्यार करता था. लड़की रोज़ उससे कहती कि अगर वो देख पाती तो उसी से शादी करती. एक दिन किसी ने उसको अपनी आँखें दे दी. जब वो देख सकने लगी तो उसने देखा उसका वह दोस्त अंधा था. दोस्त ने पूछा कि क्या अब वो उससे शादी करेगी? लड़की ने साफ इनकार कर दिया. इस पर दोस्त मुस्कुराया और चुपचाप उसे एक काग़ज़ देकर चला गया. उसपर लिखा था.
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“मेरी आँखों का ख्याल रखना.”
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Must reply me if you like this.

Love

August 12, 2009 By: Mukesh Gupta Category: Love

प्यार क्या है?


जब से यह दुनिया बनी है सभी इसी प्रशन का उत्तर जानना चाहते हैं परन्तु यह प्यार क्या है आज तक किसी की समझ में नहीं आया. कोई इसे बीमारी कहता है तो कोई पागलपन, किसी को ये एक दूसरे के प्रति आकर्षण लगता है तो किसी को दुनिया की सबसे प्यारी चीज़. फिर आखिर ये प्यार है क्या बला? मेरे ख्याल से प्यार एक ऐसा खूबसूरत एहसास है जो जब महसूस होता है तो सब कुछ अच्छा लगने लगता है वो सब भी जिसे आप नापसंद करते हो.
कहते हैं जब किसी को प्यार होता है तो समझो वो गया काम से, उसका फिर किसी चीज़ मे मन नहीं लगता, हर वक़्त बस उसी का ख्याल रहता है जिसे वो प्यार करता है, उसी से हर वक़्त बातें करने का और उसी को देखते रहने का मन करता है. उसके सामने आते ही दिल की धड़कने तेज़ हो जाती हैं, दिल बोलना तो बहुत कुछ चाहता है पर जुबान ना जाने क्यों दिल का साथ नहीं देती.
जब मुझे पहली बार प्यार हुआ था तो मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. मैं जो कभी 10 बजे से पहले सो कर नहीं उठा, उसके एक दीदार के लिए सुबह 6 बजे उठ जाया करता, क्योंकि वह समय उसके स्कूल जाने का होता था. मैं उसके घर के बाहर उसकी एक झलक के इंतज़ार मैं खड़ा रहता, जब वह अपने बालों को संवारती हुई बरामदे पर आती तो ऐसा लगता जैसे मैं जन्नत मे खड़ा किसी अप्सरा को देख रहा हूँ. बस उसकी यही छवि मेरे दिलोदिमाग मे बसी हुई है.
पता नहीं वो प्यार था या सिर्फ उस उम्र में होने वाला एक आकर्षण मात्र पर जो फिलिंग्स मुझे महसूस तब होती थी तब से पहले कभी नहीं हुई. मुझे बस खुदसे एक ही शिकायत है की मैं उससे कभी अपनी फिलिंग्स का इज़हार नहीं कर पाया. आज वो मेरे साथ नहीं है पर आज भी कभी कहीं प्यार के बारे में जिक्र होता है तो उसकी याद मेरे दिल को तड़पा जाती है.

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