Love
ढाई आखर प्रेम का
तेरी……….मेरी…………सबकी कहानी,
ढाई…आखर…..रब कि निशानी,
दो मन अनजाने खिचें, बरबस ही मिल जाये |
अदभुत शक्ति प्रेम की, जो जाने सो पाये ||
नाता अजब है प्रेम का, कितने भी हों दूर |
बढ़े निकटता आप ही, चाह मिलन भरपूर ||
गुण अवगुण परखे बिना, अपना जो हो जाए |
मिलते मन अनायास जब, प्रेम वही कहलाए ||
व्यक्त होते नहीं शब्द में, प्रेम के बोल अबोल |
नयन कहत मन सुनत हैं, अंतर के पट खोल ||
रिश्ता नाता प्रेम का, बिना छुए जुड़ जाये |
एक जनम की क्या कहें, अनंत जनम सिरजाये ||
कहना चाहे मन बहुत, भूल जाए पिय देख |
दशा अनोखी प्रेम की, सत्य कहे मन लेख ||
मूड मूड पिय को देखना, लाज लगे हस देय |
अनुभव मीठे प्रेम के, हसे फसे सो लेय ||
जाने पर कह सके नहिं, प्रेमी प्रेम का रोग |
लाख छुपाए फिरत पर, भेद खोलते लोग ||
रहे दूर मन में बसे, पास लगे बहु दूर |
प्रेम का मंतर तोड़ता, अंतर का दस्तूर ||
प्रेम ढिंढोरा ना पीटीये, परख लीजिये साज़ |
वाणी कुछ ना कहत पर, नयन खोलते राज़ ||
डगर सुहानी प्रेम की, जहाँ ठगी ना होय |
ठगी होय जिस डगर पर, प्रेम डगर न सोय ||
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाए |
जोड़े से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परि जाए ||
कहना मन सब चाहता, सबसे रहा छुपाय |
अनजाना अनकहा ये, नाता प्रेम कहाय ||
जीवन के हर मोड़ पर, प्रेम प्रेरणा देत |
हित की बात करे सदा, बदले कुछ ना लेत ||
परिभाषा बहु प्रेम की, देश काल अनुसार |
अर्थ न बदला प्रेम का, बदला सब संसार ||
क्या उपमा दूँ प्रेम को, प्रेम प्रेम कहलाय |
यदि उपमा दूँ प्रेम को, प्रेम झूठ हो जाय ||
प्रेम है इक आराधना, सफल साधना ग्यान |
बिना प्रेम की सत्य कहे, सफल नही इंसान ||
पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया ना कोय |
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय ||
तेरी……….मेरी…………सबकी कहानी,
ढाई…आखर…..रब कि निशानी.
