WOH CHHOOTIN PYAR KI BAATEN….
जो बातें प्यार की छूटीं हैं अब तक,
आज करनी हैं …
सुनो जी काम छोड़ो , पास बैठो…
शाम की गाड़ी पकड़नी है ….
वो पैंतीस साल पहले रात,
जोआई सुहानी थी…
वो गुजरी रात मे अभिसार की,
प्यारी कहानी थी ….
वो जो छूटीं रहीं इनकार मे थीं
प्यार की बातें….
वो जो मूंदीं ढकीं इनकार मे थीं ,
प्यार की बातें….
वो जिनके बीच
मुन्नू और चुन्नू का बहाना था…
वो जो इनकार मे इकरार का ही
एक फसाना था…
नही आती मुझे ज्यादा,
कभी श्रृंगार की बातें
यही कारण था कि ,
छूटीं रहीं अभिसार की बातें….
कि दिन ढालने लगा है अब ,
मचलती शाम आई है…
हमारी डूबती नब्ज़ों को,
यह पैग़ाम लाई है…
जो छूटीं थी अभी तक, आज करलो,
प्यार की बातें ….
कभी अभिसार की बातें,
कभी इकरार की बातें….
सुनो देखो न यूँ रूठो,
न शर्माने का यह पल है…
कि अपना प्यार अब, परवान चढ़ जाए
यह वो पल है …
सुनो अच्छा करो वादा
कि हम जाएँ जहाँ तक भी…
हमारे प्यार मे हरदम,
यही दम हो यही खम हो…
डॉ बृजेश

YOU ARE A GOOD WRITER
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