मेरे देश के नए वीर (स्त्री - पुरुष) तथाकथित बुद्धिज्वियों को हम जैसे नासमझ तुच्छ प्राणियों का बार - बार नमन:-
<— ये हैं आज के बुद्धिजीवी:-
शाबास अरुंधती राय तुम और तुम्हारे जैसे बुद्धि जीवी धन्य हैं, तुम जैसे बुद्धिजीवी ही लिखेंगें
इस देश का एक नया इतिहास जिसमे लिखा होगा की सिर्फ काश्मीर ही नहीं अपितु पूरा भारत
ही कभी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा ?
काश तुम्हारे जैसे बुद्धिजीवी ऐसी ही कोई बात पकिस्तान या चीन में पैदा होकर कह पाते कि
POK और चीन के हिस्से वाला काश्मीर कभी उनका नहीं था तो शायद तुम लोगो को तुरंत
मोच्छ प्राप्त हो जाता और तुम सीधे खुदा या भगवान के दर्शन कर रहें होते. क्यूंकि इस भारत
देश के लोग तो तुम जैसे हद से जयादा समझदार बुद्धिजिवियौं को मुक्ति दे नहीं सकते. क्यूंकि
अब तुम सब इतने अधिक समझदार हो गए हो कि डर लगता है कि कहीं तुम सब कल को
अपनी माँ से ही न कहने लगो कि वो जिसे तुम्हारा बाप कह रही है तुम्हारे अनुसार तो वो
तुम्हारा बाप है ही नहीं तुम्हारा बाप तो कहीं अमेरिका या पाकिस्तान होगा.
एक बार फिर से अरुंधती राय जैसे बुद्धिजिवियौं को बधाई क्यूंकि अब उम्मीद है कि वो दिन दूर नहीं जब ये बुद्धिजीवी पकिस्तान या अमेरिका का झंडा खुद अपने हाथौं से लाकर लालकिले पर लगायेंगे और हम सब भारतबासी उसी खुसी में इनकी बुद्धिजिवता के गुण गाएंगें और इनकी समझदारी के लिए इन्हें फूलों के हार पहनाएंगे.
धन्य हो मेरे देश के बुद्धिजीवी तुम्हारे जैसे लाल पैदा करने से पहले वो माँ मर क्यों न गयी.
देख लो मेरे देश के वीर शहीदों ये सब देख कर तुम्हारी आत्मा भी अपने को गाली दे रही होगी
कि आप सब शहीदों ने क्यों न इतनी समझदारी दिखाई.
