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Archive for October, 2007

bas pyar hi pyar ho

Saturday, October 20th, 2007

वो प्यार मै कहाँ से लाउ , जिससे मै तुझे अपना बना उवो बंधन मै कहाँ से लाउ, जिससे मै तुझे बाँध पौऊ
वो सपने मै कहाँ से लाउ,जिसमे मै तेरी दरश पौऊ
वो दुनिया कहाँ से लौऊ, जिसमे तुझे ख़ुश रख पौऊ

वो नूर कहाँ से लाउ,जिससे मै तुझे राह दिखौऊ
वो जज़्बा कहाँ से लाउ, जिससे तेरे बिन जी पौऊ
वो हाथ कहाँ से लाउ,जिसे पकड़ मै जीवन पार लागौऊ
तू लौट के आजा मेरे पास, अब मै धीरज कहाँ से लाउ

कैसे मुस्कुरौऊ,कैसे न आँसू बाहौऊ, मै तेरे बिन जी न पौऊ
हर पल मै तुझे बुला उ,कैसे तेरा प्यार मै भूल जौऊ
जान से भी प्यारा है तू,ये तुझे मै कैसे समझोऊ
वो प्यार मै कहाँ से लाउ,जिससे मै तुझे अपना बना उ

love is understanding & faith

Saturday, October 20th, 2007

प्यार वो ख़ुश्बू है जिससे सारा चमन महक उठता हैप्यार वो समझ है जिससे सारी दुनिया शांत हो उठती है

प्यार वो विश्वास है जहाँ अटूट बंधन बाँध लेता है
प्यार वो रंग है जो हर रंग मे मिल जाता है

प्यार बचपन से लेकर जवानी तक एक कहानी लिख जाता है
प्यार जावनी से बुढ़ापे तक एक नई दास्तान बताता है

काश ! हर तरफ़ प्यार ही होता
तो आज दुनिया का एक नया रूप होता

ye pyar kauyo hota hai

Friday, October 19th, 2007

ये प्यार क्यो होता है दिल बेकरार क्यो होता है
हर पल किसी के लिए क्यो धड़कता है
पलको मे किसी के लिए ख्वाब क्यो सजोता है

ये प्यार नये रूप को जन्म क्यो देता है
अरमानो को नये पंख क्यो लगा देता है
जीवन को एक नया इंतज़ार क्यो देता है
ये प्यार इतनी ताक़त कहा से देता है

ये काश! ये प्यार मुझे भी हो जाय
मेरी भी दुनिया नये रंगो से भर जाय
कब तक करू ये इंतज़ार
कोई आए और मुझे बाहो मे भर ले जाय