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वर्ष 2010 का आज अंतिम दिन है, आज से वर्ष बदल जायेगा सुबह नये कलेन्डर से तारीख देखेगें, यह कौन से वर्ष समाप्त हो रहा है। हिन्दुस्तान में हिन्दु वर्ष गुड़ी पड़वा से प्रारम्भ होता है, मुस्लिम माह मोहर्रम से प्रारम्भ होता है। वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से प्रारम्भ होता है। इस कलेन्डर वर्ष में इतना ओ हल्ला क्यों होता है। जिसे मनाने के लिये हर होटल में ढाबों पर कार्यक्रम होते है सारे टी.व्ही. कोई न कोई प्रोग्राम दिखाते है। हर जगह नये वर्ष मनाने के लिये धूम मची रहती है। ग्रीटिंग की दुकान सज जाती है। दुकानों पर ऑफर की धूम आ जाती है। टेलीफोनों की लाइन व्यस्त हो जाती है। रात 12 बजे लाइट को बंद कर दिया जाता है फिर चालू करके फटाकें फोडे जाते है। यह कैसा नया वर्ष है। सरकारी कार्यालयों में अवकाशों को खत्म करने के लिये अधिकतर लोग छुट्टी पर चले जाते है। नव वर्ष इस प्रकार मनाया जाता है। अधिकतर चौक चौराहों पर शराब में वाहन चलाने वालों की धड़पकड़ करने के लिये पुलिस वाले सारी रात ठण्ड मे लगे रहगें। यह कोई नया वर्ष है जिसका स्वागत ही शराब, कबाब के साथ किया जावेगा। युवा सारी रात मॉ-बाप से झूठ बोल कर रात को पार्टी में ड्रिक्ंश करेगें।
किसी ने कहा है
वर्ष विदेशी, मस्त है देशी,
पिये बोदका ओर शराब, कोई पीवे देशी, तो कोर्इ पिये विदेशी
युवा झूम रहे है होकर मस्त,
न ठण्ड की चिंता न घर की फिक्र,
वर्ष विदेशी, मस्त देशी
शुभकामनाओं के साथ आप सभी को नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें, नया वर्ष आपके लिये मंगलमय हो,
बाय बाय 2010
जाते हुये वक्त तुझसे क्या वसूले हम,
तेरे हिस्से में खुशियां कम, गम ज्यादा है।
छत्तीसगढ़ कोर्ट में सहायक ग्रेड-3 के रिक्त पदों हेतु साक्षात्कार देने के लिये रायपुर गये, वहॉ जाकर देखा अव्यवस्थाओं का भण्डार था परीक्षा जहॉ सुबह 8.30 पर शुरू होने थी, वह 10.00 बजे शुरू हो सकी। रायपुर देख कर लगा की रायपुर में विकास नहीं हुआ, रेलवे स्टेशन से कोर्ट की तरफ जाने वाली मेर सड़क खराब थी रूकने के लिये होटलों के नाम पर अधिकतर डोर मेट्री सिस्टम था खाने के होटल भी अच्छे नहीं थे। मंहगाई भोपाल से ज्यादा थी।
म.प्र. के समय से ही छत्तीसगढ़ के विकास पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया धूल बहुत अधिक उड़ रही थी। अब शायद अलग राज्य बनने पर विकास होने की उम्मीद ही की जा सकती है।
छत्तीसगढ़ कोर्ट में सहायक ग्रेड-3 के रिक्त पदों हेतु साक्षात्कार देने के लिये रायपुर गये, वहॉ जाकर देखा अव्यवस्थाओं का भण्डार था परीक्षा जहॉ सुबह 8.30 पर शुरू होने थी, वह 10.00 बजे शुरू हो सकी। रायपुर देख कर लगा की रायपुर में विकास नहीं हुआ, रेलवे स्टेशन से कोर्ट की तरफ जाने वाली मेर सड़क खराब थी रूकने के लिये होटलों के नाम पर अधिकतर डोर मेट्री सिस्टम था खाने के होटल भी अच्छे नहीं थे। मंहगाई भोपाल से ज्यादा थी।
म.प्र. के समय से ही छत्तीसगढ़ के विकास पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया धूल बहुत अधिक उड़ रही थी। अब शायद अलग राज्य बनने पर विकास होने की उम्मीद ही की जा सकती है।
विदिशा लोकसभा क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि आज तक कोई अच्छा सांसद नहीं मिला नेताप्रतिपक्ष बनी श्रीमती सुषमा स्वराज को भारत में सबसे अधिक मतो से विजय बनाकर संसद में भेजा लेकिन आज दिनांक 03.08.2010 के दैनिक भास्कर की रिपोर्ट पढ़कर ऐसा लगा जैसे कुठारघात हो गया कि हमारी सांसद क्षेत्रिय परेशानी को संसद मे उठाने की अपेक्षा भाजपा की राजनीति में लगी रहती है। टॉप में दूसरे नंबर पर संसद में अपनी कम उपस्थिति के कारण है। विदिशा का दुर्भाग्य है कि श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी चुनाव जीतकर इस्तीफा देकर चले गये और उपचुनाव हुये, श्री शिवराज सिंह जी लोकसभा जीतने के बाद मुख्यमंत्री बनने के बाद इस्तीफा दिया और फिर उपचुनाव हुये उपचुनाव में श्री रामपाल सिंह चुनाव जीत कर गायब हो गये, इस कारण जनता ने उन्हें विधान सभा एवं होशंगाबाद लोकसभा से हराकर अपना जबाब दे दिया। यदि विदिशा लोकसभा क्षेत्र की जनता को अपना भाग्य विधाता स्वंय बनना है तो इन ढोंगी लोगों से बचना होगा। श्रीमती सुषमा स्वराज जी अब तो होश में आओं जनता के दुखों को संसद में उठाओं विदिशा की जनता ने जिस विश्वास से आपको चुना है उसका विश्वास मत तोड़ो विदिशा क्षेत्र में कुछ काम करों जनता के दुखों को पहचानों और उन्हें दूर करने की कोशिश तो करों। नहीं तो इसका खमियाजा पूरी भाजपा को भुगतना पड़ेगा। जो सीट भाजपा की सीट है वह भी अगले चुनाव में उज्जैन, रतलाम की तरह कांग्रेस को ना दे दे। हवा बदलने के खातिर आंधी की आज जरूरत है, लपटों पर बैंठी दुनिया को गॉंधी की आज जरूरत है।
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है - By Ram Prasad Bismil
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।
करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।
रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह में लज्जत-ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है ।
यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।
ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां, हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।
खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मींद, आशिकों का जमघट आज कूंचे-ऐ-कातिल में है ।
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।
है लिये हथियार दुश्मन ताक मे बैठा उधर और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हाथ जिनमें हो जुनून कटते नही तलवार से सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से और भडकेगा जो शोला सा हमारे दिल में है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पे कफ़न जान हथेली में लिये लो बढ चले हैं ये कदम जिंदगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल मैं है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
दिल मे तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब होश दुश्मन के उडा देंगे हमे रोको न आज दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंजिल मे है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
आग जलनी चाहिए - दुष्यन्त कुमार (Dushyant Kumar)
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
जन्म कुण्डली दिखा लो भैया, लगी महादशा है रे, विधान सभा की महादशा में, जेसीए की अंर्तदशा है, नौकरी को बचा लो भैया, कर लो सारे काम रे, विधान सभा की महादशा में, जेसीए की अंर्तदशा है, सप्तम घर अर्थात दाम्पत्य घर में बैठे सी.ई., एस. ई. ओर संचालक तीन ग्रह है एक साथ जो करते दाम्पत्य सुख से दूर है। डी.सी. तो वक्री हो गये, खतरा सबसे ज्यादा हो गया, पी. ओ. की हो गयी ढेड़ी चाल रे, विधान सभा की महादशा में, जेसीए की अंर्तदशा है, जे.सी., (एफ. ए.) बैठे धन भाव में, खर्चे जो करवाते, विधान सभा की महादशा में, जेसीए की अंर्तदशा है, राशियों के राजा सीईओ, देते थोड़ा सा सुख, है उन्होनें मंत्री ए.ई. को दिया नाश्ता;- भोजन के आदेश रे, विधान सभा की महादशा में, जेसीए की अंर्तदशा है, नौकरी को बचा लो भैया, कर लो सारे काम रे, 30 जुलाई को खत्म होगी यह महादशा तब कुछ सुख मिल पायेगा। चलने नहीं दे रहे है, कुछ दुष्ट ग्रह इस महादशा को, करते परेशान रे, राहू-केतु बने कांग्रेसी नहीं चलने नहीं दे रहे हे इस महादशा को। तब भी झेलों महादशा को, कर लो सारे काम रे, विधान सभा की महादशा में, जेसीए की अंर्तदशा है, नौकरी को बचा लो भैया, कर लो सारे काम रे,

म.प्र. का विधान सभा सत्र चालू विधान सभा सत्र, अधिकारी/कर्मचारियों की बड़ी मुसिबत, विधान सभा सत्र चालू विधान सभा सत्र, नौकरी के लाले पड़ गये, भूले घर परिवार रे , विधान सभा सत्र चालू विधान सभा सत्र, क्या बच्चा, क्या बीबी बीमार, भूलों सब को अब तो यार विधान सभा सत्र चालू विधान सभा सत्र, शादी विवाह दोस्तों मे हो या नातेदार में, भूल गया सब सामजिक बंधा, क्या सामाजिक, क्या संस्कार रे, विधान सभा सत्र चालू विधान सभा सत्र, विधायक पूछे अपने स्वार्थों के सवाल रे, हुये अधिकारी/कर्मचारी परेशान रे, विधान सभा सत्र चालू विधान सभा सत्र, जनता के हित में ना कोई पूछे एक सवाल, कमीशन बाजी हो या भ्रष्टाचार रे, विधान सभा सत्र चालू विधान सभा सत्र, तेरहवी है यह विधान सभा ना राज्य की तेरहवी रे, विधान सभा सत्र चालू विधान सभा सत्र, जय मध्य प्रदेश
म.प्र. शासन में संविदा नौकरी पर व्यक्तियों को पदस्थ कर काम लिया जाता है। संविदा का अर्थ अधिकारियों ने शोषण से लगा रखा है। जब चाहों जैसे चाहों संविदा अधिकारी/कर्मचारियों को शोषण करों। ना तो उन्हें अवकाश की पात्रता है और ना ही घर के आवश्यक कार्य करने की कोई घर पर आवश्यक कार्य है भी तो आपको बोस ने कार्यालय बुलाया है तो आना पड़ेगा, नहीं तो नौकरी नहीं रहेगी। मंहगाई और काम न होने के कारण संविदा पर नौकरी करनी पड़ती है। सरकार न तो रोजगार के अवसर दे पा रही है। और ना ही शोषण से मुक्ति के लिये कोई काम कर रही है। गरीब बेरोजगारों को लुटने के लिये व्यापम (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) से भर्ती परीक्षा ली जाती है, जिस से एक बेराजगार को राशि रू. 300 से अधिक का भुगतान करना पड़ता है। जिस मे बाद में आता है कि व्यापम ने पेपर आउट कर पैसे के लिये बेच दिया, कर्मचारियों को पकड़ने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। म.प्र. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा योजना एवं आर्थिक विभाग में संविदा पर पदस्थ पुरूषों को पिता बनने पर पितृत्व अवकाश की पात्रता है और ना ही महिलाओं को मॉ बनने पर मातृत्व अवकाश की पात्रता है। यहॉ पर महिला प्रसूति अवकाश अधिनियम 1964 की खुलेआम धज्जियां उठाई जाती है किसी का ध्यान इस और नहीं जाता है। संविदा पर काम करना मतलब एड्स की बीमारी होना, अर्थात तिल-तिल कर मरना। संविदा पर काम करने के लिये बोस की हॉ मे हॉ मिलाना नहीं तो घर जाना, बोस की बीबी ने बोस को खाना नहीं दिया, बोस ने गुस्से में आकर संविदा वालों को चटका दिया। संविदा पर काम करने वालों के लिये न तो कोई समय निश्चित रहता है कि कब से कब तक नौकरी करनी है, जब तक बोस चाहता है आपको कार्यालय में रहना है ना उसके लिये अलग से काई भत्ता दिया जाना है यदि अवकाश के दिनों में कार्यालय में बुला है तो अन्य कार्यालयिन दिवस में अवकाश देना, संविदा पर पदस्थ व्यक्ति का भी परिवार होता है। लेकिन बोस को उससे कोई मतलब नहीं होता, बोस तो अपने समय पर खाना खाने भी घर चले चायेंगें और घर से फोन कर के बोलेंगें कि अभी कार्यालय से मत जाना में वापिस आऊगा पता चला रात को 9;00 बजे चले आ रहे है। बोस तो अपने कार्य कार्यालयीन समय में शासकीय गाड़ी का उपयोग करके भी निपटा लेते है, लेकिन संविदा पर पदस्थ व्यक्ति क्या करें कैसे अपने काम करें, बीबी बीमार है डाक्टर को देखाना है कोई मतलब नहीं बच्चों की फीस जमा करनी कोई मतलब नहीं। संविदा पर काम करने वालों के लिये ना तो मानव अधिकार आयोग कुछ करता है और ना ही प्रदेश की सरकार। संविदा पर पदस्थ व्यक्ति को हेय द़ष्टि से देखा जाता है जैसे की पूर्व में जाति-पात फैला हुआ था उसी प्रकार संविदा को डरा कर धमका कर रखा जाता है, संविदा पर नौकरी मतलब आप नीची जाति के और परमानेंट मतलब ऊँची जाति के। संविदा वालों को परमानेंट वाले ना जाने क्या समझतें है। एकदम तुच्छ सोचते है, एक को चटका दो बाकी अपने आप संभल जायेंगें। कोई कारण नहीं फिर भी डर कर जिना पड़ता है। संविदा वालों के सिर पर हमेशा तलवार लटकी रहती है। बिना कारण के कब कट जायें, मर जायें पता नहीं ? अधिकारियों को मोबाईल/कार की सुविधा लेकिन संविदा वालों को कोई सुविधा नहीं अपने पैसों से रिजार्च मोबाईल भी बैटरी खत्म होने पर बंद हो जाये तो गुस्से में कहेगें मोबाईल बंद क्यों रखा? किसी कारण से 05-10 मिनिट लेट हो जाये तो हाफ डे लगा देंगे डॉटेंगे अलग काम करायें 1 घण्डे अतिरिक्त। चैन से हमकों कभी आपने (अधिकारी) जीने ना दिया जहर भी चाहे अगर तो पीना तो (संविदा) पीने ना दिया दुनिया में अगर आये तो जीना ही पड़ेगा जिंदगी अगर जहर है तो पीना ही पड़ेगा। परिवार को अगर पालना है तो संविदा पर ही सही नौकरी करना ही पड़ेगी, बेमतलब में डॉट भी खाना ही पड़ेगी, तिल-तिल कर यहॉ जीना भी पड़ेगा। जय हिन्द,
कभी भारत सोने की चिडिया कहलाता था लेकिन अब भारत का हृदय स्थल मध्य प्रदेश अब स्वर्णिम म.प्र. हो गया है। मान.श्री शिवराज सिंह म.प्र. को स्वर्णिम करने पर तुले हुये है। जहॉ बेरोजगारी अधिक है, नौकरियॉ संविदा पर है। बिजली कहॉ है पता नहीं, सड़क का काम ठीक नहीं है। भाई भतिजावाद चरम पर है, भ्रष्टाचार सारी सीमायें तोड़ चुका है। विधायक एवं पूर्व मंत्री मर्डर केस के साक्ष्य छुपाने में जैल जा रहे है। यह स्वर्णिम म.प्र. है। मंत्री के गुर्ग मिडिया पर हमले कर रहे है। महिला उत्पीड़न के मामले सामने आ रहे है। यह स्वर्णिम म.प्र. है। स्वर्णिम म.प्र. बनाने हेतु विशेष विधान पालिका का सत्र बुलाया गया, क्या हुआ पता नहीं। यह स्वर्णिम म.प्र. है।
जय जय भाई भतीजावाद, जय जय हो भ्रष्टाचार, करो न कोई अब तुम काम यह स्वर्णिम म.प्र. है।
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