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Zasbaton ki Aandhi

कलम से नाता जोड़ने वाला, लबों से नाता तोड़ लेता है, 

बोलती है उसकी कलम ,खामोश लब होते हैं रफ़्तार सिर्फ उसकी  धडकनों में होती है….
मुझे ढूँढना है?
मेरी अधूरी कविता की पंक्ति में पा जाओ गए तुम  ,
इस दुनिया की भीड़ में मेरा क्या काम….
पुराणी पड़ी किताबों की धुल में सिमट गई हूँ मैं,
अपने टूटे सपनों से लिपट गई हूँ मैं,
खो गई हूँ मैं अपनी इस दुनिया में,
जहाँ मीलों तक सिर्फ ख़ामोशी है…..धडकनों का शोर सिर्फ मेरे अंदर है…….


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Awaazein
























कभ कभ कुछ आवा़ें हो ात है 'ामोश,
उन 'ामोश आवा़ों क 'ामोश मे बते िनों क ,
फनकार होत है,िनक ंकार िल मे सुनाई पड़त है,
कुछ आवा़ें नान हो कर भ पन ह रहत है,
"र कुछ आवा़ें चाह कर भ पन नह हो पात,
कभ कभ मुे पन ह आवा़ बे?ान ल?त है,"र कभ बे?ान आवा़ें भ मेर कहान कहत है,
कुछ आवा़ें िल मे बस ात है क कानो को वह सुनाई ेत है,
ये आवा़ें भ ब होत है,ना़ाने कानों से िल मे उतर ात है….
िल मे उतर कर र?ों मे बस ात है..
फिर र?ों से नसों मे फैल ात है…..
फिर हमारे सपनों मे आ कर सुनाई ेने ल?त है…..
"र कभ कभ तो सुबह नं भ उन्ह आवा़ों से 'ुलत है……

पूा































 














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..

कभी कभी कुछ आवाज़ें हो जाती है खामोश,
उन खामोश आवाज़ों की खामोशी मे बीते दिनों की ,
फनकार होती है,जिनकी झंकार दिल मे सुनाई पड़ती है,
कुछ आवाज़ें अनजानी हो कर भी अपनी ही रहती है,
और कुछ आवाज़ें चाह कर भी अपनी नही हो पाती,
कभी कभी मुझे अपनी ही आवाज़ बेगानी लगती है,और कभी बेगानी आवाज़ें भी मेरी कहानी कहती है,
कुछ आवाज़ें दिल मे बस जाती है की कानो को वही सुनाई देती है,
ये आवाज़ें भी अजीब होती है,नाज़ाने कानों से दिल मे उतर जाती है….
दिल मे उतर कर रगों मे बस जाती है..
फिर रगों से नसों मे फैल जाती है…..
फिर हमारे सपनों मे आ कर सुनाई देने लगती है…..
और कभी कभी तो सुबह नींद भी उन्ही आवाज़ों से खुलती है……

पूजा

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Dil ki barat

दिल की बारात कुछ यूँ निकली, अरमान बन गए बाराती सारे, खवाबों ने भी बजा दी शहनाई …

दिल का कतरा कतरा झूम कर नाचने , रोम रोम में जशन सा होना लगा ,,

मानो, भंवरों ने थाम ली हो तितलियों की कलाई,

आँखों ने भी बरस बरस कर , धो दी है ग़मों की आंधी,

दिल ने दिल को चूम लिया,कर दिया स्वागत आने का,

हाथों ने हाथों को थाम कर , आँखों ही आँखों में कर लिए साथ फेरे पूरे….

बीते लम्हों की और अंधेरों में भटकते ग़मों की होने लगी है बिदाई ,

क्यूंकि रुत अब पिया मिलन की आई….

खवाबों की शहनाई अब दिल में बजने लगी है,

घडियां मिलन की में गिनने लगी थी ……

चंद मुलाकाते और बीती बातें …और बस बीत गई वो बातें सारी मुलाकातें……

कुछ अरमानों की बिदाई हुई , कुछ ने ली अंगडाई…

कुछ सपने टूटे दिल के आँगन में, और कुछ हाथ से छुटे रात के अँधेरे में..




पूजा








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Dil ka Milan



एक रिश्ता ऐसा दिल
चाहता है


जिसमे ना कोई
कसमें हो ना वादों की बंदिशें हो,


ना महलों की
दीवारें, ना सोने चाँदी की थाली हो,


प्यार के मीठे
बोल हो, प्यार से परोसी गई प्यार की प्याली हो


दिलों में प्यार
के दिए जलते हों, ना कोई आशिक ना कोई साकी हो,


एक रिश्ता ऐसा
दिल चाहता है…



सात फेरों का ना
कोई खेल हो, दिलों से दिल का सुखद मेल हो….


तन के मिलन से
बढ़ कर , दिलों का मिलन हो,


जिसमे रीती
रिवाजों का ना कोई बोझ हो,


बस दो पंछी
उड़ते हो आकाश में , बादलों का घेरा हो,


घर के नाम पर एक
दूजे के दिलों में उनका डेरा हो….


एक रिश्ता ऐसा
दिल चाहता है,



एक पल का साथ
नही …जन्म जन्म का नाता हो…


एक ऐसा रिश्ता
दिल चाहता है………….





Pooja



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Umar ka Padav

उम्र का वो मस्त पड़ाव है “जवानी”, जिंदगी का रंग गुलाबी नज़र आता है,
एक मैं हूँ जिसे जिंदगी के पन्नो में सिर्फ काले काले धब्बे नज़र आते है,
अक्स में अपना प्रतिबिम्ब भी खाली नज़र आता है



उम्र का वो मस्त पड़ाव है “जवानी”,जिसमे पैरों तले भी आसमान नज़र आता है,
और दूर तक उड़ने को ये आकाश अपना सा नज़र आता है,
मुझे यहाँ तो जमीन पर भी होना न होना एक समान नज़र आता है,



उम्र का वो मस्त पड़ाव है ‘जवानी” , जिसमे बदन से महकते फूलों का अहसास नज़र आता है,
सोते हुए सपनों में भी, हकीकत का साथी का साथ नज़र आता है,
मेरे तो हाथों में हो किसी का हाथ, ऐसी लकीरों का हाथों में साथ नज़र नही आता,
यूँ ही गुज़र रही है जिंदगी कुछ यादों के सूखे पत्तों के सहारे,
बस डर है तो तेज़ हवा के चलने से उन यादों के पत्तों का उड़ जाने का….



उम्र के इस पड़ाव में जी भर कर जीने का,एक खवाब है
इन छोटो छोटी आँखों में खुद के लिए प्यार बेशुमार देखने का,
इन लम्हों को चुरा कर जिंदगी की किताब को रंगों से सजा लेने का…..







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Khamosh Dua

भूल जा मेरे दिल ए नादाँ उसे,न कर उसे याद आज के बाद…

इन् पलों को यूँ रुखसत न कर…

बचपन बीत गया है खेल खेले में,अब न कर यूँ जिंदगी बर्बाद इस प्यार झमेले में,

जो पल बीत जाए ख़ुशी से , उस पल को ही समेत ले तू,

जिसने गाड दी तेरी यादें किसी रहा में आते गढे में, कर ली एक नई शुरुआत जिंदगी की ,

मत कर अब तू उसके लौटने का इंतज़ार…

कुछ यूँ दिमाग ने समझाया मेरे नादाँ दिल को,क्या और कैसा समझ में आया इस नादाँ दिल को …

बस हाथ उठा कर दुआ मांग ली मैंने……

बस चैन आ जाए , पल पल भटकते मेरे दिल में …..



Pooja



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Khamosh cheekhein

दुनिया की अँधेरी गलियों में एक हँसती मुस्कुराती लड़की देखो कैसे खो गई,
न चाहते हुए भी वो दीवानी पगली हो गई,
प्यार के नाम से मानो सवंरती थी जो, आज प्यार के नाम से खामोश होने लगी है,
सोच कर अपने एक रात के सपने को जाने क्यूँ वो खोने लगी है,
सपने में राजकुमार तो आया होगा, कोई सौगात तो लाया होगा,
फिर क्यूँ वो ऐसे टूट रही है,मानो अपने ही आँगन से छुट रही है,
इन खामोशियों में चूर है वो, कुछ न कह पाए इतनी भी क्यूँ मजबूर है वो,
सखी सहलियों का संग छुट गया है, जैसे कोई पत्ता शाख से टूट गया है,
अकेली कैसे चल पड़ी वो राह को छोडे , कहाँ गया वो राजकुमार,
यूँ  उसे अकेला छोडे,
आज खामोशियाँ भी उसकी चीख रही है,और कह रही है,
रहने दो मुझे यूँ खोया खोया, क्यूँ मैंने प्यार में अपना होश खोया,
क्या हासिल हुआ उन बचपन के सपनों को सजा कर,
जिन्हें तोड़ने वाला एक पल में तोड़ गया…..



पूजा




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bas chal diye hum…..


आज फिर यादों ने मुझको घेरा है , न चाह कर भी मेरा मन तेरा…
न जाने क्यूँ तुम्हारे नाम से धड़कता है ये दिल,जाने किस बात पर मुझसे ही बिगड़ता है मेरा दिल

हर रिश्ते से छुट रहा  है दामन , हाथ खाली और दिल बेजुबान हो रह है…
मानो हर शाम लौट जाती है खाली,रह जाती हैं तो सिर्फ भीगी पलके और नज़रें  खाली….
रुत आ गई है पतझड़ वाली ,रातें हो गई हैं काली काली…
प्यार ने रंग दी थी जिंदगी और आज हर रंग लगता है खाली…

हर दिन अकेला है और रातें है तनहा सारी,न चाह  कर भी याद आ जाती है बातें सारी….
अब हर रिश्ता हमे आजमाने लगा है,क्या करें दिल भी सब जाने लगा है…..
समझ रहे हैं हम दुनिया की रमें, जहाँ सिर्फ खाने को ही होती है कसमें…..

यहाँ सिर्फ वादें तोड़ने के लिए किये जाते हैं , और दिल सिर्फ तोड़ने के लिए ही जोड़े जाते हैं…..
हम तो अब किसी प्यार न करेंगे, ये इकरार अब हम सरे आम करेंगे….
किसी को बुरी लगे ये बात, तो लगने दो….हम ये बुरा काम बार बार करेंगे….और हज़ार बार करेंगे…….

Pooja



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Kamliyan Kudiya

kamliyan ne kuryian kar bathti h mohbatein khin


sari umr jiti h mohbat ander or til til marti h andr


kamliyan ne kuryian nhi larti agr wqt pr


to sari umr larti h ander


chlti h kisik hmrah ya to chla jata h woh bdl k rh


ya har kar kisi frz ya kisi izzat k hwale se


lekr bewfai ka ilzam ankon mein liy sapno kirtai


aasu chupati chal prti h nai rah


chunti h haton se katein or krti h naye rasto ko pairo k kabil


chlti rhti h,hui anhui,thoda sa failti bhut sa bikhrti


kidhmaton mein dhuri hoti, kamliyan kuryian


dikhti h shant shahj likn ander se hoti rait rait


nhi chorte kai bar chute hue rastein


bich jate h unke kadmon mein


to bebas bhti ye nadyian


utar jati h apne dariyon mein


larjate hoton se kapnte hathon se chu leti h


apne hisse ki tukra tukra kayanat


kamliyan ne kuryian lekar bewfai ka ilzam


nibhati h sari rah sari umr khusyion se


ankon mein liy asu man mein liy kai swal


puchti h khud se or khuda se apni khtain


nhi puchti oro se nhi khti apno ko kuch


bs unki khusi mein shamil apne dukh ko samete


kamliyan ne kuryian hr waqt dusro ki khusi mein khush rhti h


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