कलम से नाता जोड़ने वाला, लबों से नाता तोड़ लेता है,
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कलम से नाता जोड़ने वाला, लबों से नाता तोड़ लेता है,
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– February 4, 2012
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– September 22, 2009
कभी कभी कुछ आवाज़ें हो जाती है खामोश,
उन खामोश आवाज़ों की खामोशी मे बीते दिनों की ,
फनकार होती है,जिनकी झंकार दिल मे सुनाई पड़ती है,
कुछ आवाज़ें अनजानी हो कर भी अपनी ही रहती है,
और कुछ आवाज़ें चाह कर भी अपनी नही हो पाती,
कभी कभी मुझे अपनी ही आवाज़ बेगानी लगती है,और कभी बेगानी आवाज़ें भी मेरी कहानी कहती है,
कुछ आवाज़ें दिल मे बस जाती है की कानो को वही सुनाई देती है,
ये आवाज़ें भी अजीब होती है,नाज़ाने कानों से दिल मे उतर जाती है….
दिल मे उतर कर रगों मे बस जाती है..
फिर रगों से नसों मे फैल जाती है…..
फिर हमारे सपनों मे आ कर सुनाई देने लगती है…..
और कभी कभी तो सुबह नींद भी उन्ही आवाज़ों से खुलती है……
पूजा
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– September 14, 2009
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– September 1, 2009
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– August 21, 2009
उम्र का वो मस्त पड़ाव है “जवानी”, जिंदगी का रंग गुलाबी नज़र आता है,
एक मैं हूँ जिसे जिंदगी के पन्नो में सिर्फ काले काले धब्बे नज़र आते है,
अक्स में अपना प्रतिबिम्ब भी खाली नज़र आता है
उम्र का वो मस्त पड़ाव है “जवानी”,जिसमे पैरों तले भी आसमान नज़र आता है,
और दूर तक उड़ने को ये आकाश अपना सा नज़र आता है,
मुझे यहाँ तो जमीन पर भी होना न होना एक समान नज़र आता है,
उम्र का वो मस्त पड़ाव है ‘जवानी” , जिसमे बदन से महकते फूलों का अहसास नज़र आता है,
सोते हुए सपनों में भी, हकीकत का साथी का साथ नज़र आता है,
मेरे तो हाथों में हो किसी का हाथ, ऐसी लकीरों का हाथों में साथ नज़र नही आता,
यूँ ही गुज़र रही है जिंदगी कुछ यादों के सूखे पत्तों के सहारे,
बस डर है तो तेज़ हवा के चलने से उन यादों के पत्तों का उड़ जाने का….
उम्र के इस पड़ाव में जी भर कर जीने का,एक खवाब है
इन छोटो छोटी आँखों में खुद के लिए प्यार बेशुमार देखने का,
इन लम्हों को चुरा कर जिंदगी की किताब को रंगों से सजा लेने का…..
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– July 29, 2009
भूल जा मेरे दिल ए नादाँ उसे,न कर उसे याद आज के बाद…
इन् पलों को यूँ रुखसत न कर…
बचपन बीत गया है खेल खेले में,अब न कर यूँ जिंदगी बर्बाद इस प्यार झमेले में,
जो पल बीत जाए ख़ुशी से , उस पल को ही समेत ले तू,
जिसने गाड दी तेरी यादें किसी रहा में आते गढे में, कर ली एक नई शुरुआत जिंदगी की ,
मत कर अब तू उसके लौटने का इंतज़ार…
कुछ यूँ दिमाग ने समझाया मेरे नादाँ दिल को,क्या और कैसा समझ में आया इस नादाँ दिल को …
बस हाथ उठा कर दुआ मांग ली मैंने……
बस चैन आ जाए , पल पल भटकते मेरे दिल में …..
Pooja
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– July 10, 2009
दुनिया की अँधेरी गलियों में एक हँसती मुस्कुराती लड़की देखो कैसे खो गई,
न चाहते हुए भी वो दीवानी पगली हो गई,
प्यार के नाम से मानो सवंरती थी जो, आज प्यार के नाम से खामोश होने लगी है,
सोच कर अपने एक रात के सपने को जाने क्यूँ वो खोने लगी है,
सपने में राजकुमार तो आया होगा, कोई सौगात तो लाया होगा,
फिर क्यूँ वो ऐसे टूट रही है,मानो अपने ही आँगन से छुट रही है,
इन खामोशियों में चूर है वो, कुछ न कह पाए इतनी भी क्यूँ मजबूर है वो,
सखी सहलियों का संग छुट गया है, जैसे कोई पत्ता शाख से टूट गया है,
अकेली कैसे चल पड़ी वो राह को छोडे , कहाँ गया वो राजकुमार,
यूँ उसे अकेला छोडे,
आज खामोशियाँ भी उसकी चीख रही है,और कह रही है,
रहने दो मुझे यूँ खोया खोया, क्यूँ मैंने प्यार में अपना होश खोया,
क्या हासिल हुआ उन बचपन के सपनों को सजा कर,
जिन्हें तोड़ने वाला एक पल में तोड़ गया…..
पूजा
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– July 8, 2009
आज फिर यादों ने मुझको घेरा है , न चाह कर भी मेरा मन तेरा…
न जाने क्यूँ तुम्हारे नाम से धड़कता है ये दिल,जाने किस बात पर मुझसे ही बिगड़ता है मेरा दिल
हर रिश्ते से छुट रहा है दामन , हाथ खाली और दिल बेजुबान हो रह है…
मानो हर शाम लौट जाती है खाली,रह जाती हैं तो सिर्फ भीगी पलके और नज़रें खाली….
रुत आ गई है पतझड़ वाली ,रातें हो गई हैं काली काली…
प्यार ने रंग दी थी जिंदगी और आज हर रंग लगता है खाली…
हर दिन अकेला है और रातें है तनहा सारी,न चाह कर भी याद आ जाती है बातें सारी….
अब हर रिश्ता हमे आजमाने लगा है,क्या करें दिल भी सब जाने लगा है…..
समझ रहे हैं हम दुनिया की रमें, जहाँ सिर्फ खाने को ही होती है कसमें…..
यहाँ सिर्फ वादें तोड़ने के लिए किये जाते हैं , और दिल सिर्फ तोड़ने के लिए ही जोड़े जाते हैं…..
हम तो अब किसी प्यार न करेंगे, ये इकरार अब हम सरे आम करेंगे….
किसी को बुरी लगे ये बात, तो लगने दो….हम ये बुरा काम बार बार करेंगे….और हज़ार बार करेंगे…….
Pooja
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– July 3, 2009
kamliyan ne kuryian kar bathti h mohbatein khin
sari umr jiti h mohbat ander or til til marti h andr
kamliyan ne kuryian nhi larti agr wqt pr
to sari umr larti h ander
chlti h kisik hmrah ya to chla jata h woh bdl k rh
ya har kar kisi frz ya kisi izzat k hwale se
lekr bewfai ka ilzam ankon mein liy sapno kirtai
aasu chupati chal prti h nai rah
chunti h haton se katein or krti h naye rasto ko pairo k kabil
chlti rhti h,hui anhui,thoda sa failti bhut sa bikhrti
kidhmaton mein dhuri hoti, kamliyan kuryian
dikhti h shant shahj likn ander se hoti rait rait
nhi chorte kai bar chute hue rastein
bich jate h unke kadmon mein
to bebas bhti ye nadyian
utar jati h apne dariyon mein
larjate hoton se kapnte hathon se chu leti h
apne hisse ki tukra tukra kayanat
kamliyan ne kuryian lekar bewfai ka ilzam
nibhati h sari rah sari umr khusyion se
ankon mein liy asu man mein liy kai swal
puchti h khud se or khuda se apni khtain
nhi puchti oro se nhi khti apno ko kuch
bs unki khusi mein shamil apne dukh ko samete
kamliyan ne kuryian hr waqt dusro ki khusi mein khush rhti h
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– June 30, 2009