कभ कभ कुछ आवा़ें हो ात है 'ामोश, उन 'ामोश आवा़ों क 'ामोश मे बते िनों क , फनकार होत है,िनक ंकार िल मे सुनाई पड़त है, कुछ आवा़ें नान हो कर भ पन ह रहत है, "र कुछ आवा़ें चाह कर भ पन नह हो पात, कभ कभ मुे पन ह आवा़ बे?ान ल?त है,"र कभ बे?ान आवा़ें भ मेर कहान कहत है, कुछ आवा़ें िल मे बस ात है क कानो को वह सुनाई ेत है, ये आवा़ें भ ब होत है,ना़ाने कानों से िल मे उतर ात है…. िल मे उतर कर र?ों मे बस ात है.. फिर र?ों से नसों मे फैल ात है….. फिर हमारे सपनों मे आ कर सुनाई ेने ल?त है….. "र कभ कभ तो सुबह नं भ उन्ह आवा़ों से 'ुलत है……
पूा
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Posted in dil ki baatein.
By Pooja Jhamb
– September 22, 2009
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