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Awaazein
























कभ कभ कुछ आवा़ें हो ात है 'ामोश,
उन 'ामोश आवा़ों क 'ामोश मे बते िनों क ,
फनकार होत है,िनक ंकार िल मे सुनाई पड़त है,
कुछ आवा़ें नान हो कर भ पन ह रहत है,
"र कुछ आवा़ें चाह कर भ पन नह हो पात,
कभ कभ मुे पन ह आवा़ बे?ान ल?त है,"र कभ बे?ान आवा़ें भ मेर कहान कहत है,
कुछ आवा़ें िल मे बस ात है क कानो को वह सुनाई ेत है,
ये आवा़ें भ ब होत है,ना़ाने कानों से िल मे उतर ात है….
िल मे उतर कर र?ों मे बस ात है..
फिर र?ों से नसों मे फैल ात है…..
फिर हमारे सपनों मे आ कर सुनाई ेने ल?त है…..
"र कभ कभ तो सुबह नं भ उन्ह आवा़ों से 'ुलत है……

पूा































 














Posted in dil ki baatein.



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