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Zasbaton ki Aandhi

कलम से नाता जोड़ने वाला, लबों से नाता तोड़ लेता है, 

बोलती है उसकी कलम ,खामोश लब होते हैं रफ़्तार सिर्फ उसकी  धडकनों में होती है….
मुझे ढूँढना है?
मेरी अधूरी कविता की पंक्ति में पा जाओ गए तुम  ,
इस दुनिया की भीड़ में मेरा क्या काम….
पुराणी पड़ी किताबों की धुल में सिमट गई हूँ मैं,
अपने टूटे सपनों से लिपट गई हूँ मैं,
खो गई हूँ मैं अपनी इस दुनिया में,
जहाँ मीलों तक सिर्फ ख़ामोशी है…..धडकनों का शोर सिर्फ मेरे अंदर है…….


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