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Ho na ho…

June 10th, 2009

बारिश हुई

फिर से महकी मिट्टी
खेतों की ओर से एक हवा आई
उड़ा ले गयी कुछ
कुछ…

धरती भीगी
पत्ते धुल गये
प्रकृति नहाई
सब हरा हरा सा
सब…

मौसम बदला
ठंढ है अब
बदन सिहर गया
अब सब बदला बदला सा है
अब…

अगर कुछ ना बदला
अभी भी
कुछ भी
तो वो हैं हम तुम
हम…

खोया क्या है
क्या था हमारा
जो था सब
था भी नही
नही…

रात हुई
आसमां देखा है
काले बादलों से ढका
शांत अविचल
अविचल…

जाने कल क्या हो
सुबह हो या नही
चलो रो लें
आंशु हों ना हो
आंशु…

धुल जाने दो
सारी तस्वीरें
खो जाने दो सारे रंग
रो लेने दो
आज…

कल हो ना हो

~*~

(Rahul)


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