Archive for the ‘Love’ category

PYAAR !!

March 28th, 2009

प्यार !

वह खुशबू है….
जिसकी
महक के
आवरण में…..
बंधे हैं
हम सभी !!!!!

कु@संत
गुड गाँव

PYAAR ! CHORI TO NAHIN HAI.

October 24th, 2007

प्यार ! चोरी तो नहीं है |

फिर,
क्यों पाप-भय से
छुपा रही हो इसे
तुम्हारी जीवनी पर जो
प्रीत के अक्षर लिखे हैं
उसे कहीं धो ना देना
नीरों से…………..
चाँद के धब्बे समझकर |
मानता हूँ मैं ……..
इस व्यस्त युग में
कठिन है
कुछ भी निभाना
इस दौड़ती भागती ज़िंदगी को
रोक पाना
किंतु इस लाल रक्त में
प्यार का लाल केशर
घुला है
क्या तुम इसे पाप कहकर
धो सकोगी ?
नहीं ना !
तो फिर क्यों
पाप-भय से
छुपा रही हो इसे
प्यार ! चोरी तो नहीं है |
प्यार !
आग की राह है
इसपर……………….
कायर हृदय से मत चलो
ज्योति से भी वंचिता है
सूर्य की इस
ज्योति से डरकर
आग में इस खिलते कमल पर
दया मत बरसाओ
(मुझपर)
दया, उपकार और करूणा
दिल की सभ्यता पर दाग है
प्रेम के इस उज्जवल शिखर पर
इन तीनों का तिलक रूपी
दाग मत लगाओ
एहसान करके प्यार की
क़ीमत चुकाना पाप है !
फूल की मधुगंध (ख़ुश्बू) को
बंदी बनाना
पाप है !
ऐसा तुमने किया नहीं
फिर
क्यों पाप-भय से
छुपा रही हो इसे
प्यार ! चोरी तो नहीं है |
……………कु. संतोष…………
……………नई दिल्ली……….
सी@संत 24/10/2007

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