हम ना जननी की जनम जनम के साथी
बनावे के कहि के
अखियाँ में उपर उठाई के पलक
अंगूरी में बोरी बोरी काजर
खीची देबू अइसन निशान
की
ठगल रहब पहर पहर !
अब त
दिलवा के टूटल ऐनकवा मे
एके चेहरावा
लऊकेला ………… कैइएगो…………
गिदी गिदी (छोटी छोटी)
ताकेला एके लेखा
टुकुर - टुकुर !!
कु@संत
गुड गाँव
HAM NA JANANI !
May 12th, 2009 10 comments »PYAAR HAM KARTE RAHE !!
May 8th, 2009 10 comments »जानकर न जानकर उनसे, प्यार हम करते रहे !
जगे हों या नींद में,
प्यार हम करते रहे !
जुगनू कोई सितारों की
महफिल मे खो गया,
चाँदनी का मानकर
प्यार हम करते रहे !
शेर:- ‘ हाय वो उनकी महकती बातें
भूल नहीं पता वो कपटी बातें ‘
उनकी बातों में आकर
प्यार हम करते रहें !
जानकर न जानकर ……….. !
चोट तो रोज़
कलेजे पे लगा करती है,
उनकी चोटों को सहलाकर,
प्यार हम करते रहे !
शेर :- ‘ वक़्त की भीड़ मे एक पल मेरा
खो गया खेलते बcचे की तरह ‘
इतना तो अनुसंधान कर ,
प्यार हम करते रहे !
अब उनको देखकर
धडकेगा नहीं दिल मेरा “नील”
परवरदिगार जानता है ,
प्यार हम करते रहे !
शेर :- ‘ इतना दानी नहीं समय जो
हर गमले मे फूल खिला दे,
इतनी भी भावुक नहीं जिंदगी,
की हर खत का उतर भिजवा दे !
इतना सब जानकर भी,
प्यार हम करते रहे !
कु@ संत
गुड गाँव
AYE KHUDA!! MAUT BHI TO SATH DE DIYA HOTA!!
May 2nd, 2009 6 comments »अपने मोती रूपी अश्कों को बहाने से पहले,
मेरे विश्वास में तो झांक लिया होता !
मेरे जिस दम पर आग की दरिया को लगाया गले,
उससे मिले ज़ख़्मों के बारे मे
मुझे भी तो अवगत करा दिया होता……..और
उस जख्म पर मुझसे प्यार का मरहम तो लगवा लिया होता !
यादों के छोटे छोटे मोतियों को बिखेरने से पहले
“बिखर रहें हैं” ये मुझे भी तो बतला दिया होता !
मैं भी उन यादों को सहेजने मे मदद कर दिया होता !
मेरी यादों को सहेज-सहेज कर रखने को कहनेवाली ,
मुझे उलझनों से मुक्ति तो दिला दिया होता !
ये स्थिति हीं नहीं आने देते हम कभी भी……..अगर
आपने पहले मुझे अपने प्यार के बारे मे बतला दिया होता !
माँग लेते हम खुदा से समय रहते……….कसम से,
देख लेते हम भी, जिसको जो करना होता कर लिया होता !
काश ! मुझे समझने की कोशिस आपने किया होता ,
खुदा ! हमे जिंदगी तो नहीं ………..
पर मौत तो साथ दे दिया होता !
कु@संत
गुड गाँव
CHUTKI BHAR SINDOOR TO DE DIYA HOTA!!
April 25th, 2009 6 comments »आज जो तुम फूलों को सहलाने आए हो,
एक बार भी तो काँटों को सहला लिया होता !
उजड़े चमन की आह मे तुम आह भर ,
आँसुओं के दो घूँट तो पी लिया होता !
सुरमई हर सांझ की आगवानी कर ,
तारकों से प्रीत तो जता लिया होता !
तब कहीं जा प्रातः की तुहिन ले ,
रश्मियों की ज्योति तो जला लिया होता !
वेदना के कुछ क्षणों मे बैठकर ,
तंत्री के तारों को तो कस लिया होता !
गीत की अनुहार में ला रागिनी ,
कुछ पल जी तो बहला लिया होता !
देख लेता पास की मज़ार को ,
श्मशानों की चिता तो सुलगा लिया होता !
लिपटी कफन के बीच ……………… माँग में ,
एक चुटकी भर सिंदूर तो दे दिया होता !
कु@संत
गुड गाँव
BHID BADHATI HIN HAI !
April 2nd, 2009 7 comments »जगह-जगह पर लगी भीड़ है
रोज़ : वहीं जगह है
और भीड़ बढ़ती हीं रहती है
रूप रोज़ बदलता है
स्वरूप वहीं रहता है
अकेले या दुकेले भीड़ बढ़ती हीं है !
अशांति के कारावास में
क़ैद है शांति
रोता है दिवस
विहँसती है रात्रि
समय रोज़ की तरह ………… आता है
(परिवर्तनीय…)
और लौट जाता है
जिएं या मरें भीड़ बढ़ती हीं है !
कु@संत
गुड गाँव
PYAAR !!
March 28th, 2009 8 comments »प्यार !
वह खुशबू है….
जिसकी
महक के
आवरण में…..
बंधे हैं
हम सभी !!!!!
कु@संत
गुड गाँव
Good Morning
March 14th, 2009 6 comments »The person who is always smiling doesnot mean that he has no problems, But the smile shows that he has ability to overcome all those problems. so keep smiling!!!!
GOOD MORNING FRIENDS!!
MUJHEY CHAHANEWALI AAJ TAK MUJHEY PATTHAR HIN SAMAJHATI RAHI !!
MAIN MOM HUN USANE KABHI MUJHEY CHHUKAR BHI NAHIN DEKHA…….!!!!
JEEWAN KA SATYA!
March 3rd, 2009 5 comments » डाल की फुनगी पर फूल खिलता है लेकिन धूल मे गिरकर वह मुरझा जाता है. डाल पर विहसना और मिट्टी पर मुरझाना - कितना हास्यास्पद है !जबकि जिंदगी की पूर्णता मिट्टी मे मिल जाना है. जिंदगी की पूर्णता पर रुदन और जिंदगी के अधूरेपन पर अट्टहास नासमझी के सिवा
और क्या कहा जा सकता है!
अपूर्णता मे पूर्णता समझकर जीना क्या यह भी जीना है ? जिंदगी का सत्य अपना सौरभ बिखेरने , मुस्कान और उल्लास को बांटने बस
दूसरों के लिए अपना समझकर सबकुछ लुटाने और मिट्टी मे मिल जाने मे है फिर इस सत्य से इतनी घबराहट क्यो ? सत्य को
आँसुओं मे डुबाना क्यो?
कु@संत
गुड गाँव
CHAAND : PATTHAR KA TEELA
February 11th, 2009 9 comments »सुबह की सुबकती वायु में
नीलकमल को देखकर जलचरों ने कहा -
यह अनंत है
असीम है !
संध्या की सुरमई बाहों में
नीलकमल को देखकर जलचरों ने कहा -
यह सचित्र है
विचित्र है !
तालाब के तलवे पर चमकते
चाँद को देखकर जलचरों ने कहा -
यौवन मे खिला है
कितना रंगीला है !
ठिठोलियों के बीच ठमक कर ठुमकते हुए
जलचरों ने कहा -
हुआ लाल- पीला है
बेचारा !!
पत्थर का टीला है!!!!!
कु@संत
गुड गाँव
EK TUMHARA SWAR !
February 9th, 2009 9 comments »एक तुम्हारा स्वर
मिले …………. गर
मेरे एक स्वर से
तो तूफ़ाँ की डोर
होत *भोर
मैं दे दूँ तुम्हे
जो तुम्हे स्वराज़ से सुराज़ तक ले जाएगी !
चाँदनी का चौक
रोती रात
गड़ी शर्म से
भू पड़ी बेहोश
‘भूखी पॉश’
एक तुम्हारी ज्योति
मिले ………….. गर
मेरी एक ज्योति से
तो क्रांति की डोर
होत भोर
मैं दे दूँ तुम्हें
जो तुम्हें इंकलाब से शांति तक ले जाएगी !!
* भोर= सवेरा
कु@संत
गुड गाँव