कोई आंधी कोई तूफान ना मिला होता,
तो मेरी आनहों को भी सहारा मिल गया होता.
दर्द की राहों मे दर्द ही मिला करता हे,
खुशियों की महफिल मे कोई गम्खुअर नही होता.
लगा तो लेते हें लोग गेरों को भी अपने सीने से,
बेगानों की बस्ती मे उनका घरबार नहीं होता.
जला दिए जाते हें लोग नफरत आग मे,
उन बुझते हुए चरागोन से किसी को सरोकार नही होता.
सिसकियों मे गुजर जाती हे बहोटों की ज़िंदगी,
उन सिसकी भरे पलों का कोई हिसाब नही होता.
[सीमा]
उन सिसकी भरे पलों का कोई हिसाब नही होता…….beautiful lines..
उन सिसकी भरे पलों का कोई हिसाब नही होता…….beautiful lines..
nice one, siskiyan ka hisab nahi hota…
simply stunning.
well said!