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siskiyan

कोई आंधी कोई तूफान ना मिला होता,
तो मेरी आनहों को भी सहारा मिल गया होता.

दर्द की राहों मे दर्द ही मिला करता हे,
खुशियों की महफिल मे कोई गम्खुअर नही होता.

लगा तो लेते हें लोग गेरों को भी अपने सीने से,
बेगानों की बस्ती मे उनका घरबार नहीं होता.

जला दिए जाते हें लोग नफरत आग मे,
उन बुझते हुए चरागोन से किसी को सरोकार नही होता.

सिसकियों मे गुजर जाती हे बहोटों की ज़िंदगी,
उन सिसकी भरे पलों का कोई हिसाब नही होता.

[सीमा]

Posted in Poetry.


5 Responses

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  1. Gopi Goswami says

    उन सिसकी भरे पलों का कोई हिसाब नही होता…….beautiful lines..

  2. Gopi Goswami says

    उन सिसकी भरे पलों का कोई हिसाब नही होता…….beautiful lines..

  3. prashant shah says

    nice one, siskiyan ka hisab nahi hota…

  4. RUDRA says

    simply stunning.

  5. KB says

    well said!


« khuaab talaash »