अपने ही घर मे आस्तीन के सांप पलते रहे,क्या
बताएँ हम किस किस तरह से चलते रहे.
दुश्मनों की खास शक्ल होती नही
वो दोस्त बनकर ही दगा देते रहे.
मुहोब्बत की राह मे चलते हुए,
नफरतों पर हम फ़ना होते रहे.
क्या करें जो रूठ गई हमसे बहार,
हम तो गुल ए तर पर फिदा होते रहे.
काँटों की क्या बात करें ए जनाब ,
हम तो कलियों से घायल होते रहे.
‘सीमा’ मे बांधकर हर मुहोब्बत,हर नज़र,
दिल से दिल अक्सर ज़ुदा होते रहे.
[ सीमा ]
it was a thoughtful post
Waah Kya baat hai……. is Seema ki Koi sima nahi!!!!
bahut sundar….
Seema ji
Gar ho ya bahar, hamesha savdhan rahna chaiye, Savdhani Hati aur durgatna gati, isliye darne ki jarurat nahi he. me hu na.
Omprakash
excellent
Seema ji…sunder rachna…..all the best
nice.