गर हो तुम बेवफा तो
खुदगरज़ हम भी कम नाही
हुमने अगर ले लिया नाम तेरा
रुसवा मेरी मोहबत होगी तुम नाही
मेरी पलकों की चावन् मे
अब ना तलाशो च्छाट अपना
इन घरौंडो मे अब
आँसू भी नाही तुम भी नाही
हम तो बाहर हैं,
नई दुनिया बसा लेंगे
बदल की तरह जहाँ रो देंगे
नई फसल खिशियों की उगा देंगे
दुनिया तेरी कैसी होगी
जब हम ना होंगे
तुमने तो कदर ही ना जानी
मेरे मुस्कान की मेरे आँसुओं की
ना कार शाद-ए-दिल अपना
शशांक देता नाही बद्दुआ कोई
गर हो तुम बेवफा तो
खुदगरज़ हम भी कम नाही
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