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Rain Rain come again…!!

प्यारे दोस्तों ,

आज मै आपके सामने अपना लिखा हुआ एक गाना प्रस्तुत कर रहा हूँजिसे मैंने एक फिल्म के लिए लिखा था , दुर्भाग्यवश वो फ़िल्म रिलीज़ ही नही हो पायीमुंबई में अभी बारिश शुरू हुई है, ये गीत इस मौसम के लिए उपयुक्त और सटीक रहेगा

आई ऋतु मस्तानी रे , काली घटा छाई रे ,

रिमझिम बूंदों में भीगे तन मस्ती सी आई रे ……. कि काली घटा छाई रे

- पीहू पीहू पपीहा चिल्लाये प्यास बुझी है उनकी ,

कीट पतंगे नाच उठे , मेंढक टर्राये सनकी

पूरी हो गयी आशाएं जैसे इन सबके मन की ,

इस मौसम में याद सताई हमको भी बस उनकी ।

गोरे गोरे गाल पे जिनके जुल्फें लहरायीं रे ……. कि काली घटा छाई रे ।

- छतरी लेकर निकल पड़े सब बाजारों की ओर,

इधर भी पानी , उधर भी पानी यही मचा है शोर

वो आई बिन छतरी के तो नाचा मन में मोर ,

बोला आजा छतरी में , बारिश पकडेगी ज़ोर

यारो बारिश हुई तेज़ पर वो नहीं आई रे ……. कि काली घटा छाई रे ।

- भीग गए कपड़े उसके और चिपक गए थे तन से,

उनको ढीला करती थी वो कुछ शर्माते मन से

फिर भी अपना काम किए जाती थी बड़ी लगन से ,

मुझको कर गयी दीवाना वो पूरे तन -मन- धन से

भीगी जुल्फों को संवारती लगती थी प्यारी रे ……. कि काली घटा छाई रे ।

आई ऋतु मस्तानी रे , काली घटा छाई रे ,

रिमझिम बूंदों में भीगे तन मस्ती सी आई रे ……. कि काली घटा छाई रे ।

—-श्रेय तिवारी , मुंबई

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The key of success…positive thinking…!!

सफलता सभी को अभीष्ट हैउसे प्राप्त करने पर प्रसन्नता होती हैअसफलता कोई नही चाहता , यदि वह किसी प्रकार पल्ले बंध जाए , तो दुःख और पश्चात्ताप ही प्रदान करती हैइतना होते हुए भी लोगो में एक बुरी किस्म की भ्रान्ति यह पाई जाती है कि अपने को असहाय, परावलम्बी मानते रहते है और असफलता का दोष और सफलता का श्रेय दूसरों को देते रहते हैं ।   अपनी ओर नहीं निहारते और यह नही सोचते कि अपने गुण - दोषों कि तरफ़ देखेंयह नहीं विचारते कि अपनी त्रुटियां , दुर्बलताएं और भूलें ही असफलताओं के लिए प्रधानतया जिम्मेदार होती है और जो सफल होते हैं, उनमे उनके गुण, स्वभाव, मान्यताओं एवं धारणाओं का भी बड़ा हाथ होता है
 
मनुष्य की संरचना इस स्तर की है कि यदि वह श्रेष्ठ, स्वाबलंबी एवं सद्गुणी बनकर रहे तो असफलताओं से कदाचित ही पाला पड़ेऔर यदि कोई विपन्नता आकस्मिक रूप से भी जाए, तो ज्यादा देर तक टिकने पाए ।  उसका समाधान किसी ना किसी प्रकार निकल ही आए
 
असफलताएं लगातार मिलने , प्रगति की दिशा में कदम बढ़ पाने और अवगति के देर तक बने रहने का एक ही कारण है - अपने गुण , कर्म और स्वभाव में त्रुटियों का बाहुल्य होना, व्यक्ति के व्यक्तित्व का परिष्कृत , परिपक्व होनाभगवान ने मनुष्य को इतनी विशेषताओं और विभूतियों से सम्पन्न बनाया है कि वह साधारण स्थिति में पड़ा रहकर क्रमशः उन्नति कि दिशा में निरंतर आगे बढ़ सकता है और इतना ऊँचा उठ सकता है जितना कि उसका स्रजेता ।  क्रमबध्द रोप्प से अनवरत चलने वाली चींटी भी इतने ऊँचे पर्वत शिखर पर जा पहुँचती है कि ये विश्वास करना कठिन होता है कि इतना छोटा प्राणी , इतने नन्हे से पैरों के सहारे इतनी ऊंचाई तक किस प्रकार ऊँचा उठ सकता हैकिंतु यदि पवन कि गति से चलने वाला गरुण भी आलस्य , प्रमाद से अपने पुरुषार्थ को तिलांजलि दे तो वह आजीवन जहाँ का तहां ही बैठा रहेगा
 
व्यक्ति का अपना मनोबल ही उसे अग्रगामी बनाने में प्रधान रूप से शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करता रहा है। गुत्थियों के समाधान में उसी के द्वारा उत्पन्न सूझ बूझ ने सहायता दी है और कठिनाइयों के सरोवर से उतारकर पार किया है ।  इसमे किसी दैवीय सहायता को अथवा व्यक्ति विशेष को श्रेय देने में यही लाभ है कि अपना अंहकार नहीं बढ़ पाता, नम्रता बनी रहती है और आस्तिकता की  भावना पनपती है कि मेरे प्रभु की कृपा से मुझे इतना कुछ मिल चुका है और इससे अधिक की इच्छा अपंग होने के समान है
 
वस्तुतः ईश्वर विश्वास का ही दूसरा नाम आत्मविश्वास है , जिसमे जितना आत्मविश्वास सघन हो , समझना चाहिए कि वह उतना ही बड़ा ईश्वर विश्वासी हैजो अपने को दीन-हीन , अपंग, असमर्थ अनुभव करता है , वह उतने ही स्तर का नास्तिक हैआत्मशक्ति की गरिमा को भूल जाने और उसका प्रयोग करने में गडबडाने , लड़खडाने में ही व्यक्ति दीन -हीन बनकर रह जाता है और पग -पग पर असफलताएं प्राप्त करता है
 
सिफलिस रोग की औषधि खोजने वाले प्रसिद्ध विज्ञानी डॉक्टर अर्लिक ने अपनी दवा का नाम रखा६०६’। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने ६०५ बार बुरी तरह असफल रहने के बाद ६०६ वी बार सफलता पायी थी ।  इस विलक्षण नाम के पीछे उद्देश्य मात्र इतना था कि लोग यह जान सकें कि असफलता ही सफलता की जननी हैअसफलता से निराश नहीं होना चाहिए
 
अपनी सामर्थ्य को भूल जाना अथवा उसका प्रयोग सही रीति से , सही समय पर बन पड़ना ही वह  दुर्भाग्य है , जिसे असफलताओं का जनक कहा जा सकता है , दुसरे लोग भी अड़चन उत्पन्न कर सकते है , परिस्थितियां भी प्रतिकूल हो सकती हैंइतने पर भी मनुष्य के पुरुषार्थ की धार इतनी कुंठित नही हो जाती , कि उन अगणित अवरोधों को निरस्त ना कर सके , अंधेरे में नए प्रकाश की किरण का उदय ना कर सके
 
—-श्रेय  तिवारी , मुंबई

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Ohh my poor motherland…!

देखो गरीब की ड्योढी (दरवाजा) से, माँ शिशु को तन से ढांक रही है ,

मेरी भारत माँ की गोदी में , मानवता थर - थर काँप रही है

- हे शीत बता क्यों आता है , क्यों कोहरा ओस बिछाता है,

उस इन्सां को क्या लाता है , जो ठिठुर - ठिठुर सो जाता है

उसकी चादर की तन से कम , शायद नाप रही है,

मेरी भारत माँ की गोदी में , मानवता थर - थर काँप रही है ।

- चल ग्रीष्म बता तू क्या कम है , लपटों का अंधड़ हर दम है,

माँ झल्लाती पंखा (हाथ का पंखा) क्यो कम है, नन्हे मुन्ने का रोदन है .

पल्लू से पोंछ पसीने को , माँ बच्चे का दुःख भांप रही है .

मेरी भारत माँ की गोदी में , मानवता थर - थर काँप रही है ।

३- हे मेघराज क्यों आते हैं , जब जल ही जल बरसाते हैं ,

जा देख जरा उसकी कुटिया, छप्पर, छत , छान चुचाते हैं ।

तब अश्रुधार नैनों से बाहर झाँक रही है

मेरी भारत माँ की गोदी में , मानवता थर - थर काँप रही है ।

- हे मानव क्या दया समेटे हो , कुत्तों को सब सुख देते हो ,

मानवता कुचल गई पग से कुछ शर्म करो , तुम राष्ट्रपिता के बेटे हो

(यहाँ पर मैंने यमक अलंकार डाला है , मानव की प्रकृति , और प्रकृति दोनों एक जैसी हो गई है , जिस तरह से प्रकृति को किसी व्यक्ति विशेष से कोई लेना देना नही होता , उसी तरह से आज का इंसान भी बन चुका है )

तुझ पर प्रकृति अपनी प्रकृति को पूरा पूरा छाप रही है

मेरी भारत माँ की गोदी में , मानवता थर - थर काँप रही है ।

श्रेय तिवारी , मुंबई

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I am back…!!

Dear Friends & iLanders,

I have come back at our blogging adda (rediff iLand). Very soon I’ll try to write something for you. Kindly be in touch. I’ll be waiting for your comments.

Best

Shreya Tiwari, Mumbai

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Ohh GOD, Please change my inner soul…!!

अनदेखा  कर  सबके  आंसू , अपना  ही  सोचे  जाता  हूँ ,
ख़ुद  अंगारों  से  बचता  हूँ , फिर  क्यो  उपदेश  सुनाता  हूँ ।
 
-अब  मुझको  ये  लगता  है  संसार  में  ही  दुःख  भरा  पड़ा,
इस  दुःख  का  भी  कारण है , कारण  के  पीछे  कौन  खड़ा  ?
कैसे  क्या  कर  डालूं   ऐसा ,     रोज  विचार  बनाता  हूँ , 
कोशिश  करने  की  कोशिश  में  ही  फँस  कर  रह  जाता  हूँ । 
 
अनदेखा  कर  सबके  आंसू , अपना  ही  सोचे  जाता  हूँ ,
ख़ुद  अंगारों  से  बचता  हूँ , फिर  क्यो  उपदेश  सुनाता  हूँ ।
 
2- कैसे  बचता रहता  हूँ  मै  अपने  ही  कर्तव्यों  से ,   
भौतिकता  में  उलझा  हूँ , है  प्यार  मुझे  क्यो  द्रव्यों  से ?
नफ़रत  होती  है  ख़ुद  से , सब  पल  में  भूले  जाता  हूँ ,
जब  रोज  सवेरे  उठता  हूँ , माया  के  ही  गुण गाता हूँ । 
 
अनदेखा  कर  सबके  आंसू , अपना  ही  सोचे  जाता  हूँ ,
ख़ुद  अंगारों  से  बचता  हूँ , फिर  क्यो  उपदेश  सुनाता  हूँ ।
 
3- प्रभु  तुम  मेरी  सोच  बदल  दो , मै  समाज  से  जुड़  जाऊं ,
आंसू  पी  लूँ  मै  सबकेसुख  अपने  सबको  दे  जाऊं
झकझोरो  अंतर्मन , कैसा  जीवन  जिए  जाता  हूँ ?
अपना  अपना  करता  था , सबको  मै  अब  अपनाता  हूँ । 
 
अनदेखा  कर  सबके  आंसू , अपना  ही  सोचे  जाता  हूँ ,
ख़ुद  अंगारों  से  बचता  हूँ , फिर  क्यो  उपदेश  सुनाता  हूँ ।
 
—–श्रेय तिवारी , मुंबई

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U.P. Ka Bhaiyya…!!

प्यारे दोस्तों ,
एक दिन मैंने सोचा कि मुंबई के लोग यू पी के लोगों से भेद भाव क्यों करते है , क्या कारण है । कुछ तो राजनैतिक है , और कुछ पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के अशिक्षित लोगो का आचरण है , जो मुंबई या किसी भी बड़े शहर में जाकर अपने कृत्यों को नही सुधारतेउनका भी कोई दोष नही है , क्योकि वो बड़े ही सीधे साधे लोग होते है जो काम की तलाश में शहरों की तरफ़ जाते हैऐसा ही एक नज़ारा जो मैंने एक दिन ट्रेन में देखा , उसे मै छंद के रूप में आप के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ , यहाँ मै किसी की भावना को ठेस पहुँचाने नही आयाफिर भी यदि किसी को कोई आपत्ति है तो मै क्षमा प्रार्थी हूँ

एक दिन चढा मै, तो रेल का सुनाऊ हाल

पास मेरे आके बैठा यूपी का भैय्या

बीच की निकाली मांग होठ सारे लाल लाल ,

खून सा पिए बैठा था पान का खबैय्या

मुझसे पूछे बार बार कहाँ को जाओगे जी साब,

तंग आया मैंने कहा तेरे घर जाऊंगा ,

बोला मेरा घर कहाँ , गाँव से मै आज आया ,

यारी मुझसे करो मै तुम्हारे घर आऊंगा .

चपर चपर करे मेरा चाटा था दिमाग ,

बात करे थूक मारे और मारे ठट्ठा

जाने क्या बिगाडा मैंने, पीछे मेरे पड़ गया ,

बड़ा था कमीना , साला- उल्लू का पट्ठा।

जैसे तैसे शांत किया तो भी हा -हा ही- ही करे ,

छोरी संग नयना लडावे वो लफंगा

बड़ा समझाया पर अकड़ दिखाए लूलू ,

एक हाथ का नही था , दिखता पतंगा

ताक रहा बार बार एकटक सामने ही ,

क्योकि आगे वाला था जनानी वाला डिब्बा

छेड़ रहा छोरी को तो मारा उसने मुंह पे हाथ ,

मेरे कपडो पे आए पीक के से धब्बा

सवेरे सवेरे ठर्रा पी के मस्त झूम रहा था ,

बात जब करे मारे बदबू का भभका

मेरे जैसा एक समझावे उसे बार बार ,

जिंदगी है तेरी कम तू जवान लड़का

उसको लगा यू पी का है इसलिए बेज्जती,

तो मैंने खोला राज बेटा मै ना मुम्बईया

करम सुधार बस नाम क्यों करे ख़राब ,

मै भी तेरे जैसा ही हूँ यू पी का ही भैय्या

——श्रेय तिवारी , मुंबई

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Ohh My Love…..!!

साथ तूने क्यों छोड़ा मेरे हमसफ़र ,
धड़कनें थम गयीं रूह बेजान हैं
तेरी राहें तकीं हर मिनट हर घड़ी ,
क्या है हालत मेरी तू ना अंजान है।
 
- तू शमां है मेरी मै पतंगा तेरा ,
तेरे दामन में ही तो मेरी जान है ,
ख़ाक हो जाऊँगा तेरे आगोश में ,
पर तू लौ बन दिए पर मेहरबान है।
 
साथ तूने क्यों छोड़ा मेरे हमसफ़र ,
धड़कनें थम गयीं रूह बेजान हैं ।
 
- तू जिधर जाए जग में उजाला करे,
घर  में  मेरे  अंधेरों  की  ही शान है
मै तो  पत्थर  बना राह में  हूँ  पड़ा , 
तेरी ठोकर मेरे तन की मेहमान है
 
साथ तूने क्यों छोड़ा मेरे हमसफ़र ,
धड़कनें थम गयीं रूह बेजान हैं ।
 
- चंद लम्हे तेरे साथ जीने का मन,
विनतियां  कर रहा वो नहीं मानती । 
आँख तेरी  चुभा  दूंगा  मै  हर घड़ी ,
राख बन जब उठूँगा मै शमशान से ।
 
साथ तूने क्यों छोड़ा मेरे हमसफ़र ,
धड़कनें थम गयीं रूह बेजान हैं ।
 
—-श्रेय तिवारी , मुंबई
 

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Pain of a daughter….!!

 

                                                       प्यारे दोस्तों

ये कविता मैंने मेरे देश की बेटियों के लिए लिखी है , और यदि मेरी यह कविता किसी भी बेटी और बहन के अंतर्मन को झकझोरते हुए उसकी आँखों में अश्रु की एक बूंद या भावनाओं का सैलाब लेकर आती है , तो मै समझूंगा मेरा कविता लिखना सफल हो गया
 
ये रिश्ते , ये रिश्ते , ये कैसे है रिश्ते ?
ये किसने बनाये है ममता के रिश्ते । 
 
- मै नन्ही कली, तेरी बगिया में आई ,
मेरी माँ ने मुझको थी लोरी सुनायी । 
वो पापा का घोड़ा बनाकर खिलाना ,
वो उंगली पकडके यूँ चलना सिखाना । 
 
मेरे जन्म दाता है मेरे फ़रिश्ते , 
ये किसने बनाये है ममता के रिश्ते । 
 
- वो राखी के आते ही सजना संवरना ,
तो भाई से तोहफे की जिद रोज करना
मै रुठुं तो मुझको वो हंसके मनाये ,
मुझे प्यार से छुटकी कहके बुलाये
 
अरे ऐसे बंधन नही होते सस्ते   ,
ये किसने बनाये है ममता के रिश्ते । 
 
- जाने कली से बनी फूल कैसे ,
समय सब गुज़ारा हो चुटकी में जैसे
बनी आज पापा के कंधे का बोझा ,
कहे दूजे घर को तू तैयार हो जा
 
चली मै तो बाबुल के घर से सिसकते ,
ये किसने बनाये है ममता के रिश्ते । 
 
- बहुत से घरों को मै मनहूस छाया ,
मेरी माँ ने जाना तो गर्भ गिराया  ।
माँ मै बता कैसे बेटे से कम हूँ ,
बुढापे की लाठी बनूँ मै क्या कम हूँ
 
परी बनके आँगन में हम भी चहकते ,
ये किसने बनाये है ममता के रिश्ते । 
 
——श्रेय तिवारी , मुंबई
 
 

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I have been Tagged……..!!

Hi Friends….

I have been tagged by Nivia & Asha. Thanks for this honour.

RULE #1 : People who have been tagged must write their answers on their
blogs and replace .Any question that they dislike with a new question formulated by them.


RULE #2: Tag 5 people to do this quiz and those who are tagged cannot
refuse. These people must state who they were tagged by and cannot tag the person whom they were tagged by. Continue this game by sending it to other people.

……

1)If your lover betrayed you, what would be your reaction?

No problem…….I have another one (ek jayegi to dusri aayegi).

2)If you could have one dream come true, which one it would be?

I would be helping others (tan se, man se, aur dhan se)

3)Is there any person whom you like to meet atleat ONCE in life time?

Bahadur sipahiyon se jo hamari raksha ke liye seema par ladte hue apni jaan de dete hai…….they are real HEROS.

4)What you would do with billion dollars?

If I become a billionaire I would give it to the charity. Desh me rahne wale bhookhe aur nirvastra logo ko khana, kapada aur shiksha (education) dena hi meri priority hogi……!!

5)Will you fall in love with your best friend?

If you are talking about iLand…My best friend is ASHA….otherwise My best friend is SHREYA TIWARI, and i love myself….kyoki jo apne astitva ko samjhate hue khud se pyar karte hai…vo dusron se bhi pyar karte hai….!!

6) Which is more blessed? LOVING someone or BEING loved by someone

Definitely being loved by someone is more blessed rather than loving. Vaise dard to har halat me hota hai…..!!

7)How long can you wait for someone you love?

I can’t wait because I am very punctual and this is my strength. But it depends….I love my parents and I can wait for them….!!

8) If the person you like finds someone better than you, what would you do?

Every person in this world is better than me….and I try to learn something from him…I would like to take his qualities.

9)If you could root for one social cause which one it would be?

One social cause I would like to serve people but not as a politician.

10)What takes you down the fastest?

Nothing really.

11)Would you like to have the job you

love or you love the job you have?

I love the job…I have.

12)Darna manaa hai ..but

what is the thing you fear the most?

I don’t want to heart anyone. Mere kisi bhi vyavhar se kisi ka man dukhi na ho jaye…iska hi dar rahta hai……!!

13)What kind of the person do you

think the person is who has tagged

you?

Nivia is good friend of mine. She is very nice, beautiful, gorgeous, loving and caring person.

14)Would you rather be single and

rich or married and poor?

Single and rich….hahahahaha…..married to bechara vaise ho poor hota hai..!!

15)What is your best pass-time? Why?

My best past-time is reading books

and writing HINDI poetry. Mere lekhan se mai logo ko badalna chahta hun….Mai vo likhna chahta hun…jo logo ki soch aur antaraatma ko jhakjhor de…..!!

16)What would you like to change in

you?

Mai kabhi kabhi paise ka durupyog karta hun…..aur mai apni yahi aadat badalna chahunga…….!!

17)Do you believe in giving everything

in relationship?

No, I don’t believe……!!

18)What is eating you now?

Nothing right now.

19)Why you are in iland?

To sharing my poetry and thoughts.

20)Describe yourself in a sentence.

I am a simple person but love my principles……!!

____________________________________________

And now I tag…

1- Disha Tripathi

2- Pradeep

3- Priyanka Dutta

4- Priti

5- Ashwini

6- Vichitra Kumar Gupta

7- Shashi

8- Hina Rizvi

9- Madhu Singh

10- Rajesh B

Thanks…

Best

Shreya Tiwari…

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Come on India…do something…!!

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बिगुल  बजाओ ललकारो चढ़  जाओ अपने हाथी पर ,
क्यो सोते हो मार गिराओ चढ़ दुश्मन की छाती पर ।


१- मेरा भारत किसी समय शेरों  में जाना जाता था ,
गुर्राता था तब दुश्मन झट से पीछे हट जाता था ।
आज बेचारा धमकी देकर ख़ुद रातों को जाग रहा ,
एक पड़ोसी गीदड़ इसको छका -छका कर भाग रहा ।
कुछ खूनी वहशी  आकर धरती की इज्जत लूट गए ,
दस जुगनूँ  घर में  घुसकर सूरज के मुंह पर थूक गए ।
क्रिया पर प्रतिक्रिया ना करना हमको तो खेल हुआ ,
न्यूटन का तृतीय नियम भी इसके आगे फेल हुआ ।


आज अहिंसावादी गाँधी रोता पड़ा समाधी पर ,
क्यो सोते हो मार गिराओ चढ़ दुश्मन की छाती पर ।


२- काले दिलवाले हमसे तो प्यार की बातें करते हैं ,
पाकिस्तानी भारत में आ उल्लू सीधा करते हैं ।
प्यार हमारा ही पाकर वो भेद हमारे जान गए ,
खून बहाने वालों को हम शान्ति दूत क्यो मान रहे ।
क्यों इनको आमंत्रित करते मेरे देश की धरती पर ,
बॉलीवुड क्यों नही सोचता इन सब की पाबंदी पर ।

हक खाकर भारतवासी का शोहरत नाम कमाते है ,
मेरी थाली में खाकर भी गीत पाक के गाते है ।

मै खुश होऊंगा अब इन कठमुल्लों की बर्बादी पर ,
क्यो सोते हो मार गिराओ चढ़ दुश्मन की छाती पर ।


३- सारे आतंकी बैठे है जिसके मैले दामन में ,
ज़हर उगलने वाले बैठे हर गलियारे आँगन में ।
आज विश्व में हर कोई इस सच्चाई को जान गया ,
मानवाधिकार आयोग भी आख़िर इन बातों को मान गया ।
फिर क्यो चुप बैठे है हम क्यों नही चढाई करते है ,
खून का बदला खून से लेने में आख़िर क्यों डरते है ।
नौ - ग्यारह हमले का बदला यूएस ने ले डाला था ,
अफगानी धरती पर घुसकर तालिबान को मारा था । 


शर्म क्यों नही करते है हम ऐसी इस आज़ादी पर ,
क्यो सोते हो मार गिराओ चढ़ दुश्मन की छाती पर ।


४- मै स्वागत करता हूँ होटल ओबेरॉय के कहने का ,
नही मिलेगा मौका अब पाकिस्तानी को रहने का ।
ये सीधी सी  बात हमारी दिल्ली नही समझती है ,
कर्जा  लेने की खातिर इन सबकी लार टपकती है ।   
इस कारण अपने आका (U.S.A.) को नाखुश  देख नही सकते ,
देश की किसको फिक्र यहाँ , ये कोई फ़र्ज़ नही रखते ।
मरते है हम और शिकायत आकाओं से करते है ,
क्या मजबूरी है जो हम हमला करने से डरते हैं ।


हिरदय डोल रहा ऐसी कायरता और लाचारी पर ,
क्यो सोते हो मार गिराओ चढ़ दुश्मन की छाती पर ।

—-श्रेय तिवारी , मुंबई

 

Bigul bajao lalkaro chadh jao apne hathi par,

Kyo sote ho maar girao chadh dushman ki chhati par .

 

1- Mera Bharat kisi samay shero me jana jata tha,

Gurrata tha tab dushman jhat se pichhe hat jata tha .

Aaj bechara dhamki dekar khud raton ko jaag raha,

Ek padosi geedar isko chhaka chhaka kar bhag raha .

Kuchh khooni vahashi aakar dharti ki ijjat loot gaye,

Dus jugunu ghar me ghuskar suraj ke munh par thook gaye.

Kriya par pratikriya na karna hamko to khel hua,

“Nyutan” ka tratiya niyam bhi iske aage phel hua.

 

Aaj ahinsawadi Gandhi rota pada samadhi par…  

Kyo sote ho maar girao chadh dushman ki chhati par .

 

2- Kale dilwale humse to pyar ki baate karte hai..

Pakistani bharat me aa ullu sidha karte hai..

Pyar hamara hi paakar vo bhed hamare jaan gaye.

Khoon bahane walon ko hum shanti doot kyo maan rahe..

Kyo inko aamantrit karte mere desh ki dharti par..

Bollywood kyo nahi sochta in sab ki pabandi par…

Haq khakar bharatwasi ka shohrat naam kamate hai.

Meri thali me kha kar bhi geet Pak ke gate hai….

 

Mai khush hounga ab in kathmullon ki barbadi par…

Kyo sote ho maar girao chadh dushman ki chhati par .

 

3- Sare aatanki baithe hai jiske maile daman me…

Zahar ugalne wale baithe har galiyare aangan me..

Aaj vishva me har koi is sachchaai ko jaan gaya…

Manavadhikar aayog bhi aakhir in baton ko maan gaya..

Phir chup kyo baithe hai hum kyo nahi chadhai karte hai,

Khoon ka badla Khoon se lene me aakhir kyo darte hai..

Nau- Gyarah (9/11) hamle ka badala US ne le dala tha …

Afgani dharti par jaakar Taleban ko mara tha …..

 

Sharm kyon nahi karte hai hum aisi is aajadi par…

Kyo sote ho maar girao chadh dushman ki chhati par .

 

4- Mai swagat karta hun Hotel OBEROY ke kahne ka

Nahi milega mauka ab pakistani ko rahne ka….

Ye sidhi si baat hamari Delhi nahi samajhti hai..

Karza lene ki khatir in sabki laar tapakti hai…

Is karan apne aaka (US, UK) ko nakhush dekh nahi sakte.

Desh ki kisko fikra yahan ye koi farz nahi rakhte…

Marte hum hai aur shikayat aakaon se karte hai…

Kya mazboori hai jo hum humla karne se darte hai..

 

Hirday dol raha aisi kayarta aur lachari par….

Kyo sote ho maar girao chadh dushman ki chhati par .

 

——Shreya Tiwari

 

 

 

 

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