Kaarwan

गुनगुनी धूप मे कुछ ख्याल पिघलते रहे,कारवाँ बढ़ता गया और साथ छूटते रहे,उस धूल की कीमत तो बस ये ज़मीं हि जानती है,मुसाफिर तो बस कदमों के निशान छोड़ते रहे,कारवाँ बढ़ता गया और साथ छूटते रहे,जिनके तज़ुर्बे मे थी कुछ पुरानी धड़कने,हमारी धड़कनों मे वो अपने जज़्बात ढूंढते रहे,कारवाँ बढ़ता रहा और साथ छूटते रहे,जिन [...]


Manzar

दुनिया की भीड़ में मैने आज एक मंज़र देखा, मौत के सीने मे चुभा ज़िंदगी का खंज़र देखा,वो आँखें जो कंचों सी चमकती थी,उसकी गोद में बैठकर,आज उन्ही आँखों मे मैने,लालच का समंदर देखा,वो जो अपना हमसफ़र छोड़ गयी,अपनी तमाम दौलत के साथ,उस दौलत के हुए तुम,पर उस हमसफ़र की ओर से पलटती,तुम्हारी नज़रों को मैने [...]


Bachpan…

आहिस्ता - आहिस्ता, छुप -छुप के हम सपने पाला करते थे,जब आते थे काले बादल,हम रंग उछाला करते थे,ठंडी - ठंडी ओस कि बूंदे,जब फूलों पर पड़ती थी,अपने नन्हे हाँथों से हम,उन्हे सवांरा करते थे,आहिस्ता - आहिस्ता,छुप - छुप के हम सपने पाला करते थे,जब रात ढले,और नटखट तारे आसमान पर चढ़ते थे,तो अपनी झिलमिल [...]