डूबती खामोश रातों का पता किसे मालूम है,जहाँ जाकर ठहर जाएँ कदम,वो रास्ता किसे मालूम है,यू तो सैकड़ो मांझी खेलते है…समंदर की गोद में,पर जिस लहर से खेलकर रूठ जाए ज़िंदगी,उस लहर के लौटते निशाँ,किसे मालूम हैं,यू तो तड़पती है ज़मी इस तपिश केज़ख़्म भी कुछ खूब हैं,पर बरसती बूंदों से मिलकरउठे जो आह….उसकी खुशबू [...]
