Skip to content


Gazal

Krishna Bihari ‘Noor’ — hindi aur urdu literature me ek khas makaam rakhate hain.I am presenting his three Gazals —I am sure it will be liked :—-

एक गज़ल उस पे लिखूँ

इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तकाज़ा है बहुत
इन दिनों ख़ुद से बिछड़ जाने का धड़का है बहुत

रात हो दिन हो ग़फ़लत हो कि बेदारी हो
उसको देखा तो नहीं है उसे सोचा है बहुत

तश्नगी के भी मुक़ामात हैं क्या क्या यानी
कभी दरिया नहीं काफ़ी, कभी क़तरा है बहुत

मेरे हाथों की लकीरों के इज़ाफ़े हैं गवाह
मैं ने पत्थर की तरह ख़ुद को तराशा है बहुत

कोई आया है ज़रूर और यहाँ ठहरा भी है
घर की दहलीज़ पा-ए-नूर उजाला है बहुत

 

अपने होने का सुबूत

 

अपने होने का सुबूत और निशाँ छोड़ती है
रास्ता कोई नदी यूँ ही कहाँ छोड़ती है

नशे में डूबे कोई, कोई जिए, कोई मरे
तीर क्या क्या तेरी आँखों की कमाँ छोड़ती है

बंद आँखों को नज़र आती है जाग उठती हैं
रौशनी एसी हर आवाज़-ए-अज़ाँ छोड़ती है

खुद भी खो जाती है, मिट जाती है, मर जाती है
जब कोई क़ौम कभी अपनी ज़बाँ छोड़ती है

आत्मा नाम ही रखती है न मज़हब कोई
वो तो मरती भी नहीं सिर्फ़ मकाँ छोड़ती है

एक दिन सब को चुकाना है अनासिर का हिसाब
ज़िन्दगी छोड़ भी दे मौत कहाँ छोड़ती है

मरने वालों को भी मिलते नहीं मरने वाले
मौत ले जी के खुदा जाने कहाँ छोड़ती है

ज़ब्त-ए-ग़म खेल नहीं है अभी कैसे समझाऊँ
देखना मेरी चिता कितना धुआँ छोड़ती है
 
नज़र मिला न सके उससे
 
 
नज़र मिला न सके उससे उस निगाह के बाद ।

वही है हाल हमारा जो हो गुनाह के बाद ।।


मैं कैसे और किस सिम्त मोड़ता ख़ुद को,

किसी की चाह न थी दिल में, तिरी चाह के बाद ।


ज़मीर काँप तो जाता है, आप कुछ भी कहें,

वो हो गुनाह से पहले, कि हो गुनाह के बाद ।


कहीं हुई थीं तनाबें तमाम रिश्तों की,

छुपात सर मैं कहाँ तुम से रस्म-ओ-राह के बाद ।


गवाह चाह रहे थे, वो मिरी बेगुनाही का,

जुबाँ से कह न सका कुछ, 'ख़ुदा गवाह' के बाद ।

Posted in Poetry.



11 Responses

Stay in touch with the conversation, subscribe to the RSS feed for comments on this post.

  1. nirdosh kapoor says

    thanx for sharing ….

  2. beena john says

    bohot badiya…pls. use bigger font..

  3. anvesh khansali says

    WAH………THANX 4 SHARE IT

  4. KB says

    thanks for sharing!

  5. DISHAA TRIPATHI says

    Photobucket for sharing

  6. samina khan says

    very nice post… keep posting.. thanx

  7. lovebird says

    JANAB NOOR KI IN DILKASH GAZALOK KE LIYE SHUKRIYA. DIN KIE HAR PAHAR PAR HUKUMAT HO AAPKI. YEHI DUA KARATE HAI AAMIN KAHANE KE PAHALE. HAV A WONDERFUL DAY

  8. ramnath rajaram says

    BAHOOT HI UMDA KAHA HAI MAZZA AA GAYA

  9. Archana Srivastava says

    beautiful…….! thanks for sharing such beautiful work….

  10. sarita singh says

    beautiful gazal…thanks for sharing with us…

  11. akhtar rizvi says

    Diwakar bhai…aap ne Krishan Bihari Noor sahab ki ghazlen share karke bahut achcha kiya…barson pehle ki unse mulaqat yaad aa gai…thanks for share us..all the best