January 2010
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जय श्री कृष्ण

जय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद -जिस यज्ञ में अर्पण ब्रह्म है,हवन किया द्रव्य ब्रह्म है,और ब्रह्म कर्ता द्वारा,ब्रह्म रूप अग्नि में,आहुति भी ब्रह्म है,उस ब्रह्म कर्म में,प्राप्त फल भी ब्रह्म है. अ.4 श्ल. 24और -
दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते.ब्रह्मग्नावपरे यज्ञं यग्नेनैवोपजुव्हति..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 25


जय श्री कृष्ण

ॐजय श्री कृष्णहिन्दी अर्थ -जिसकी आसक्ति नष्ट हुई है,जिसमें देहाभिमान नहीं,जो ममता से रहित है,जो सदैव परमात्मा में स्थित है,ऐसे यज्ञ संपादन हेतु कर्मी के,सारे कर्म विलीन हो जाते हैं. स.4 श्ल. 23
और -ब्रह्मार्पणम ब्रह्म हविर्ब्रह्मग्नौ ब्रह्मणा हुतम्.ब्रह्म्नैव तेन गंतव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 24


जय श्री कृष्ण

 जय श्री कृष्णहिन्दी अर्थ -जो रहे संतुष्ट स्वप्राप्त वस्तु से,जो रहे ईर्ष्या हर्ष शोक से दूर,ऐसा सिद्धि असिद्दि में सम,कर्म करते भी मुक्त रहे. श्री मद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 22और गतसन्गस्य मुक्तस्य ज्ञानावस्थितचेतसः.यज्ञायाचरतः कर्म स्मग्रम प्रविलीयते..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 23