ॐ जय श्री कृष्णअन्य योगी सन्यमाग्नि में,श्रोत्रादि समस्त इंद्रियों को हवन करते हैं,दूसरे कई योगी शब्दादि समस्त विषयों को,इंद्रिय रूप अग्नि में हवन करते हैं. अ.4 श्ल. 26और - सर्वानीन्द्रीयकर्मानी प्राणकर्मानी चापरे.आत्मसंयमयोगागनौ जुह्वति ज्ञानदीपिते..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 27
