जय श्री कृष्ण
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जय श्री कृष्ण
कई पुरुष द्रव्यसंबंधी यज्ञ करें,
कितने तपस्या रूप यज्ञ करें,
कई योग रूप यज्ञ करते,
कितने अहिंसादि तीक्ष्ण व्रतों
से युक्त यत्नशील पुरुष,
स्वाध्याय रूप ज्ञान यज्ञ करते हैं. अ 4 श्ल 28
और भी -
अपाने जुव्हति प्राणं प्राणेपानं तथापरे.
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः..
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 29
