ॐजय श्री कृष्ण
श्रीमद्भागवत नवम स्कंध अ. 11
संस्कृत:
तस्मिन स भगवान रामः स्निग्ध्या प्रिययेश्त्या .रेमे स्वारामधिराणामऋषभः सीतया किल. 35
बुभुजे च यथाकालम् कामान धर्मंपीडयन् .वर्षपूगां बहुन न्रुनामभिघ्यातादग्रिपल्लवह .36
अर्थ:
परीक्षित ! भगवान श्रीरामजी आत्माराम जितेन्द्रिय पुरुषों के शिरोमणि थे. उसी महल में वे अपनी प्राणप्रिया प्रेममयी पत्नि श्रीसीताजी के साथ विहार करते थे.सभी स्त्री पुरुष जिनके चरणकमलों का ध्यान [...]
