July 2010
M T W T F S S
« Apr    
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  

जय श्री कृष्ण

ॐजय श्री कृष्ण
श्रीमद्भागवत नवम स्कंध अ. 11
संस्कृत:
तस्मिन स भगवान रामः स्निग्ध्या प्रिययेश्त्या .रेमे स्वारामधिराणामऋषभः सीतया किल. 35
बुभुजे च यथाकालम् कामान धर्मंपीडयन् .वर्षपूगां बहुन न्रुनामभिघ्यातादग्रिपल्लवह .36
अर्थ:
परीक्षित ! भगवान श्रीरामजी आत्माराम जितेन्द्रिय पुरुषों के शिरोमणि थे. उसी महल में वे अपनी प्राणप्रिया प्रेममयी पत्नि श्रीसीताजी के साथ विहार करते थे.सभी स्त्री पुरुष जिनके चरणकमलों का ध्यान [...]


जय श्री कृष्ण

ॐ जय श्री कृष्णश्रीमद्भागवत अध्याय 4
श्री शुक उवाचअम्बरीषो महाभागः सप्त द्वीप वतीं महिम.अव्ययाम् च श्रियँ लब्ध्वा विभवं चातुलम् भुवि. 15मेनेअतिदुर्ल्भम पुंसां सर्वँ तत स्व्प्न्सम्स्तुतम.विद्वान विभावनिर्वाणं तमो विशति यत पुमान्.16वासुदेवे भगवति तद्भक्तेषु च साधुषु.प्राप्तो भावं परम् विश्वं येनेदं लोष्ट्वत स्मृतम्.17स वै मनः कृष्णपदारविण्दयोरवचांसि वैकुंठगूणानुवार्णने.करौ हरेर्मंदिरमाजनादीषू श्रुति चकाराच्युतसत्कथोदये.18
श्री शुकदेवजीने कहापरीक्षित ! अंबरीश बड़े भाग्यवान थे . [...]