July 2010
M T W T F S S
« Apr    
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  

जय श्री कृष्ण

ॐजय श्री कृष्णहिन्दी अनुवाद - दूसरे योगीजन इंद्रियों,तथा प्राणों की क्रियाओं को देखते हैं, फिरज्ञान से प्रकाशित आत्मसंयम योगरूप,अग्नि में हवन कर देते हैं.आगे -द्रव्ययज्ञास्तपोयज्ञा योगयज्ञास्तथापरे,स्वाध्यायज्ञानयज्ञयाश्च यतयः संशितव्रताः.


जय श्री कृष्ण

 
ॐ जय श्री कृष्णअन्य योगी सन्यमाग्नि में,श्रोत्रादि समस्त इंद्रियों  को हवन करते हैं,दूसरे कई योगी शब्दादि समस्त विषयों को,इंद्रिय रूप अग्नि में हवन करते हैं. अ.4 श्ल. 26और - सर्वानीन्द्रीयकर्मानी प्राणकर्मानी चापरे.आत्मसंयमयोगागनौ जुह्वति ज्ञानदीपिते..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 27   


जय श्री कृष्ण

 
जय श्री कृष्णहिन्दी अर्थ - दूसरे कई योगीजन,देवता पूजन यज्ञ का,भलीभांति अनुष्ठान करते हैं,और कई परब्रह्म परमात्मा,रूप अग्नि में अभेददर्शन रूप,यज्ञ के द्वारा आत्मरूप यज्ञ,का हवन करते हैं.  अ. 4 श्ल. 25और -श्रोत्रादिनीन्द्रियन्ये संयामागनीषु जुव्हती.शब्दादिन्विश्यान्य इन्द्रियाग्निशु जुव्हती..श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 26