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जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

मनुष्य जो कर्म में अकर्म, अकर्म में कर्म देखे,
वही मनुष्यों में बुद्धिमान है,
वही योगी समस्त कर्मों का करने वाला है,
वही सज्ञान है. आ.4 श्ल. 18

आगे -

यस्य सर्वे समारंभाः कामसंकल्पवर्जिताः.
ज्ञानागनिदग्ध्कर्मणम तमाहुः पंडितम् बुधाः..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 19


जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

कर्म का स्वरूप भी जानो,
अकर्म का भी,
और विकर्म का भी जानो,
गहन कर्म की गति तभी. अ.4 श्ल. 17

आगे -

कर्मन्यकर्म य: पश्येद्कर्मनि च कर्म य:.
स बुद्धिमांमनुष्येषु स युक्त कृतसनकर्मकृत.

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 18


जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

कर्म और अकर्म क्या हैं?
बुद्धिमान भी मोहित हो जाएँ,
इसीसे कहूँगा इसका भेद,
जिसे जान बंधन मुक्त हो पाएँ. अ.4 श्ल.16

आगे -

कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः.
अकर्मनश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 17


जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

पूर्व में भी इसी तरह,
मुमुक्षुयों ने कर्म किए,
इसे जान कर,
करो कर्म तुम भी,
पूर्व की तरह,
इसे पहचान कर. अ. 4 श्ल. 15

आगे -

किं कर्म किमकर्मेति क़वयो$प्यत्र मोहिता:.
तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसे$शुभात..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 16


जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

कर्म मुझे लिप्त नहीं करते,
न कर्मफल में मेरी स्पृहा,
इस तरह जो जाने मुझे,
वो कर्मों से मुक्त रहा. अ. 4 श्ल. 14

आगे -

एवं ज्ञात्वा कृतम् कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः.
कुरु कर्मैव तस्मात्त्वम् पूर्वैः पूर्वतरं कृतम्..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 15


जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र,
ये सब समूह सब प्रकार हि मैं रचता,
यूँ सब प्रकार सृष्टि, रचनादि कर्म का कर्ता भी,
मैं अविनाशी परमात्मा रहता अकर्ता. अ.4 श्ल.13

आगे -

न मां कर्मानि लिंपन्ति न मे कर्मफले स्पृहा.
इति मां यो$भिजानाति कर्मभीर्न स बध्यते..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 14


जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

जो फल को चाहें लोक में,
भजते अन्य देवता,
इससे उनके कर्मों का फल,
शीग्र देवें देवता. अ. 4 श्ल. 12

आगे -

चातुर्वर्ण्यम् मया सृष्टं गुणकर्मविभागश:.
तस्य कर्तारमपी मां विद्धयकर्तारमव्ययम..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 13


जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

हे अर्जुन ! जो मुझे जैसा भजता है,
वैसा ही मैं उसे भजता हूँ,
क्योंकि सभी मनुष्य, सब प्रकार मेरा ही अनुसरण करते हैं.
यही मैं भी करता हूँ. अ. 4 श्ल. 11


आगे -

कांक्षन्तः कर्मणाः सिद्धिं यजन्तः इह देवताः.
क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 12


जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

पहले भी जो राग, भय, क्रोध से मुक्त हो गए,
और मुझमें प्रेमपूर्वक स्थित हो गए,
ऐसे मेरे आश्रित और उपर ज्ञान तप से शुद्ध हुए,
सब लोग मेरे स्वरूप को प्राप्त हो गए. अ. 4 श्ल. 10

आगे -

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम.
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 11


जय श्री कृष्ण


जय श्री कृष्ण

हिन्दी अनुवाद -

हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म दिव्य हैं ,
इस तरह जो तत्वतः जान जाए,
वह शरीर को त्याग कर मुझे पा जाए,
बार बार जन्म मरण से मुक्त हो जाए. अ. 4 श्ल. 9

आगे -

वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिता:.
बहवो ज्ञान तपसा पूता मद्भावमागताः ..

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 10.